भारत निर्वाचन आयोग ने 2026 चुनावों में ईवीएम-VVPAT के दो चरणों के रैंडमाइजेशन से पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की।
आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने व्यापक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि ईवीएम और वीवीपैट मशीनों का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दो चरणों के रैंडमाइजेशन के जरिए किया जा रहा है। पहले चरण में जिला स्तर से विधानसभा क्षेत्रों को मशीनें आवंटित की जाती हैं, जबकि दूसरे चरण में इन्हें मतदान केंद्रों तक वितरित किया जाता है।
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पहला रैंडमाइजेशन जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा ईवीएम मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया। इस प्रक्रिया के तहत करीब 8.85 लाख ईवीएम यूनिट्स (बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट) चुनावों के लिए निर्धारित की गई हैं।
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दूसरे चरण का रैंडमाइजेशन रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा संबंधित उम्मीदवारों की उपस्थिति में पूरा किया गया है। यह प्रक्रिया असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनावों के लिए लागू की गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ईवीएम और वीवीपैट के आवंटन की सूची सभी उम्मीदवारों के साथ साझा की जाएगी। इससे चुनाव प्रक्रिया में विश्वास और निष्पक्षता और मजबूत होगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों के लिए दूसरा रैंडमाइजेशन नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद नियमानुसार किया जाएगा।
निर्वाचन आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे मतदाताओं का भरोसा और मजबूत होगा।

