प्रधानमंत्री मोदी ने महावीर जयंती पर कोबा तीर्थ में सम्राट सम्प्रति संग्रहालय का उद्घाटन किया, जहां जैन विरासत और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम दिखता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महावीर जयंती के पावन अवसर पर गुजरात के गांधीनगर स्थित कोबा तीर्थ में सम्राट सम्प्रति संग्रहालय का भव्य उद्घाटन किया। यह संग्रहालय भारतीय संस्कृति, जैन दर्शन और प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करने का एक अनूठा प्रयास है। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का संगम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह संग्रहालय भारतीय सभ्यता के तीन मूल स्तंभ—अध्ययन, साधना और अनुशासन—का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि कोबा तीर्थ सदियों से इन मूल्यों की परंपरा को संजोए हुए है और अब यह संग्रहालय उसे आधुनिक रूप में दुनिया के सामने पेश करेगा।
यहां पारंपरिक प्रदर्शनों के साथ-साथ डिजिटल और ऑडियो-विजुअल तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे आगंतुकों को एक इमर्सिव अनुभव मिलेगा।
सम्राट सम्प्रति की विरासत को समर्पित
प्रधानमंत्री ने कहा कि सम्राट सम्प्रति ने अपने शासन में अहिंसा, सत्य और नैतिकता को प्राथमिकता दी। यह संग्रहालय उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
उन्होंने कहा, “जहां अन्य शासक शक्ति का प्रदर्शन करते थे, वहीं सम्राट सम्प्रति ने मानवता और धर्म के मार्ग को अपनाया, जो आज भी प्रेरणादायक है।”
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2000 से अधिक प्राचीन कलाकृतियां प्रदर्शित
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बताया कि संग्रहालय में 2,000 से अधिक ऐतिहासिक और धार्मिक कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। यह संग्रहालय शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए ज्ञान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
वहीं उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
वैश्विक मंच पर जैन दर्शन का प्रसार
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह संग्रहालय न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर जैन धर्म और भारतीय मूल्यों का संदेश भी देगा।
उन्होंने जैन संतों और समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास भारत की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेगा।
निष्कर्ष
सम्राट सम्प्रति संग्रहालय उद्घाटन भारत की सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को न केवल इतिहास से परिचित कराएगा, बल्कि उन्हें भारतीय मूल्यों और परंपराओं से भी जोड़ने का कार्य करेगा।

