हरियाणा सरकार ने ₹100 करोड़ के ग्रीन क्लाइमेट फंड, यमुना शुद्धिकरण मिशन और मसानी बैराज प्रदूषण समाधान के जरिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
हरियाणा सरकार ने राज्य को जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाते हुए ₹100 करोड़ के सीड फंड के साथ “हरियाणा ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड” स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। यह घोषणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के वर्ष 2026-27 के बजट भाषण के दौरान सामने आई।
राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने बताया कि इस फंड का उद्देश्य हरियाणा में शून्य-उत्सर्जन वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, शहरी हरियाली और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना है। यह पहल वर्ष 2070 तक भारत के नेट-जीरो लक्ष्य के अनुरूप राज्य को स्वच्छ और हरित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार ने केवल योजनाएं बनाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है। रेवाड़ी जिले के मसानी बैराज में राजस्थान के धारूहेड़ा क्षेत्र से आ रहे दूषित पानी की समस्या को गंभीरता से लिया गया है, जिससे 16-17 गांवों की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। इस पानी में रासायनिक अपशिष्ट की अधिकता भूमि की उर्वरता को नुकसान पहुंचा रही है।
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इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगभग ₹150 करोड़ की परियोजना तैयार की जा रही है। इसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ₹100 करोड़ का योगदान देगा, जबकि हरियाणा और राजस्थान सरकार ₹25-25 करोड़ साझा करेंगी।
इसके साथ ही, हरियाणा सरकार 313 किलोमीटर लंबी यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक विशेष मिशन शुरू करने जा रही है। इस मिशन के तहत सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाना, अनियंत्रित अपशिष्ट प्रवाह को रोकना, औद्योगिक इकाइयों की रियल-टाइम निगरानी, नदी तटों का संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कदम उठाए जाएंगे।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक यमुना में गिरने वाले सभी नालों के पानी का वैज्ञानिक उपचार सुनिश्चित करना है, जिससे नदी को पूरी तरह स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके।
राव नरबीर सिंह ने विश्वास जताया कि इन पहलों से हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी और राज्य तेजी से सतत एवं हरित विकास की ओर आगे बढ़ेगा।

