हरियाणा सरकार ने यमुना प्रदूषण नियंत्रण के लिए हर नाले पर अलग समिति बनाने का फैसला लिया, सीवेज ट्रीटमेंट और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन को भी किया जा रहा मजबूत।
हरियाणा सरकार ने यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के प्रयासों को तेज करते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई कार्ययोजना लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में सीवेज उपचार, औद्योगिक अनुपालन और सीवरेज अवसंरचना से जुड़े कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में जानकारी दी गई कि यमुना में मिलने वाले 11 प्रमुख नालों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1632 एमएलडी अपशिष्ट जल नदी में प्रवाहित होता है। इनमें से लगभग 1000 एमएलडी जल का उपचार किया जा रहा है, जो नदी के पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हर नाले के लिए बनेगी अलग समिति
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने निर्देश दिए कि यमुना में मिलने वाले प्रत्येक नाले के लिए मंडल आयुक्तों की अध्यक्षता में अलग-अलग समितियों का गठन किया जाए। इन समितियों में संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे और वे हर 15 दिन में बैठक कर अपनी रिपोर्ट हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपेंगी।
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सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता में हो रहा विस्तार
राज्य में सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में हरियाणा में 91 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 1543 एमएलडी है।
इसके अलावा:
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88 एमएलडी क्षमता के 3 नए एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिन्हें मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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227 एमएलडी क्षमता के 9 एसटीपी का उन्नयन किया जा रहा है।
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510 एमएलडी क्षमता के 9 नए एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।
औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार
औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। राज्य में 184.5 एमएलडी क्षमता के 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) पहले से संचालित हैं। इसके अलावा:
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दो सीईटीपी का उन्नयन किया जा रहा है।
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146 एमएलडी क्षमता के 8 नए सीईटीपी प्रस्तावित हैं।
अधिकांश औद्योगिक इकाइयों को अब सीईटीपी से जोड़ दिया गया है या उन्होंने अपने स्वयं के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर लिए हैं।
नालों की कार्ययोजना की समीक्षा
बैठक में धनौरा एस्केप, ड्रेन नंबर-2, ड्रेन नंबर-6, मुंगेशपुर ड्रेन, केसीबी ड्रेन, ड्रेन नंबर-8, लेग-1, लेग-2, लेग-3, बुढ़िया नाला और गौंची ड्रेन सहित कई प्रमुख नालों के लिए तैयार कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई।
इन नालों से बिना उपचारित पानी को यमुना में जाने से रोकने के लिए सीवर टैपिंग परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
सीवरेज नेटवर्क लगभग पूरा
यमुना कैचमेंट क्षेत्र के 34 शहरों में सीवरेज नेटवर्क का काम लगभग पूरा हो चुका है। प्रस्तावित 1632 किलोमीटर सीवर लाइन में से 1626.6 किलोमीटर लाइन बिछाई जा चुकी है। फरीदाबाद में शेष 5.4 किलोमीटर का काम 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
उपचारित जल का पुनः उपयोग
राज्य सरकार उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है। उपचारित जल से सिंचाई के तीन प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, जबकि ऐसे छह अन्य प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं। इससे ताजे जल स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के माध्यम से आने वाले वर्षों में यमुना में प्रदूषण के स्तर को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और नदी को स्वच्छ बनाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।

