मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में बैठक में हरियाणा में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाने, नियामकीय बोझ कम करने और डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने पर समीक्षा की गई।
हरियाणा सरकार ने उद्योगों, उद्यमियों और आम नागरिकों के लिए कारोबारी प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य में नियामकीय बोझ कम करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए कई सुधारों पर काम किया जा रहा है।
इसी क्रम में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें अनुपालन में कमी (Compliance Reduction) और डीरेगुलेशन फेज-2 के तहत किए जा रहे सुधारों की समीक्षा की गई। बैठक में भूमि विनियमों, उद्योग, बिजली, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों से जुड़े सुधारों पर चर्चा हुई।
निवेशक-अनुकूल वातावरण बनाने पर जोर
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कर निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुधार लागू किए जाएं। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नियामकीय व्यवस्था से राज्य में निवेशकों का विश्वास और मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि अनावश्यक अनुपालनों को कम करने और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने से सेवा वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
नया विधेयक लाने पर विचार
बैठक में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत करने के लिए एक बहुउद्देशीय विधेयक लाने के प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में कारोबार से जुड़े विभिन्न नियामकीय प्रावधानों को एकीकृत और तर्कसंगत बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने के बाद प्रक्रियाएं और सरल हो जाएंगी तथा अनावश्यक अनुपालन समाप्त होंगे।
डिजिटल प्रक्रियाओं को मिलेगा बढ़ावा
अधिकारियों ने बताया कि अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एकीकृत ऑनलाइन प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे उद्योगों और निवेशकों को कई सेवाएं डिजिटल माध्यम से ही प्राप्त हो सकेंगी।
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भूमि उपयोग और निर्माण अनुमति प्रक्रिया में सुधार
बैठक में नगर एवं ग्राम आयोजना क्षेत्र में सुधारों की भी समीक्षा की गई। इसमें भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल बनाना और भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र (HEPC) निवेशकों के लिए एक सिंगल विंडो सिस्टम के रूप में कार्य कर रहा है, जहां विभिन्न व्यवसायिक अनुमतियां एक ही स्थान से प्राप्त की जा सकती हैं।
MSME क्षेत्र को मिलेगा लाभ
बैठक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए कार्य वातावरण को बेहतर बनाने पर भी चर्चा की गई। इसके तहत:
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स्व-घोषणा आधारित अनुमतियों को बढ़ावा दिया जाएगा
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कम जोखिम वाले उद्योगों के निरीक्षण कम किए जाएंगे
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बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाओं की प्रक्रिया सरल की जाएगी
औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूती
राज्य सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, अग्नि सुरक्षा प्रणाली और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके साथ ही औद्योगिक प्लॉटों के उपयोग में अधिक लचीलापन और औद्योगिक श्रमिकों के लिए आवास सुविधाओं को बढ़ावा देने के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि तकनीक आधारित समाधान और आधुनिक नियामकीय ढांचा अपनाकर हरियाणा को निवेश और उद्यमिता के लिए और अधिक आकर्षक बनाया जाएगा।
बैठक में पर्यावरण, उद्योग, नगर एवं ग्राम आयोजना सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

