दिल्ली में यमुना घाटों का निरीक्षण, सफाई, साइल्ट हटाने और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए अधिकारियों को समयबद्ध कार्य के निर्देश।
दिल्ली में यमुना नदी के घाटों की सफाई और पुनर्जीवन कार्यों को गति देने के उद्देश्य से आज एक महत्वपूर्ण निरीक्षण अभियान चलाया गया। इस दौरान अधिकारियों के साथ मिलकर Taranjit Singh Sandhu ने वासुदेव घाट और यमुना बाजार घाट का दौरा किया और वहां चल रहे कार्यों की स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान घाटों की स्वच्छता, बुनियादी ढांचे और चल रही विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। विशेष रूप से साइल्ट (गाद) हटाने के कार्य को मिशन मोड में तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि मानसून से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी हो सकें।
निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि कई स्थानों पर कार्य प्रगति पर है, लेकिन उन्हें और तेज गति से पूरा करने की आवश्यकता है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
also read : Rao Narbir Singh ने पेश किया ‘विकसित हरियाणा’ विजन, 2047 तक राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी
प्रशासन का कहना है कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि देश की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसलिए इसके तटों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसी दिशा में घाटों के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इस अभियान के तहत न केवल गाद हटाने और सफाई पर जोर दिया जा रहा है, बल्कि घाटों को बेहतर सुविधाओं से लैस करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधाजनक वातावरण मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के प्रयास निरंतर जारी रहे, तो यमुना नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने और इसके पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे दिल्ली में पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘स्वच्छ यमुना’ का संकल्प केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लागू की जा रही प्राथमिकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मानसून से पहले सभी जरूरी कार्य पूरे कर लिए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या समस्या से बचा जा सके।
कुल मिलाकर, यमुना घाटों के पुनर्जीवन और सफाई को लेकर सरकार की सक्रियता यह दर्शाती है कि राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

