यमुना बाढ़ क्षेत्र की कॉलोनियों पर हाईकोर्ट आदेश के बाद सियासी विवाद तेज। लाखों लोगों के पुनर्वास को लेकर सरकारों से ठोस योजना की मांग उठी।
यमुना बाढ़ क्षेत्र में स्थित कॉलोनियों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद राजधानी की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इस फैसले ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच वर्षों से चले आ रहे दावों और वादों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आम आदमी पार्टी के नेता और सांसद संजीव झा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंचों से लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि इन कॉलोनियों को राहत दी जाएगी, किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं होगी और लोगों को बेघर नहीं किया जाएगा। हालांकि जमीनी स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों में चिंता बढ़ गई है।
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बाढ़ क्षेत्र की कॉलोनियों पर अनिश्चितता का संकट
यमुना किनारे बसे कई गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों के सामने अब बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से वे यहां रहकर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं, लेकिन अब उनके आवास, रोजगार और भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
यमुना बाढ़ क्षेत्र की कॉलोनियों पर हाईकोर्ट के आदेश ने एक बार फिर बीजेपी और दिल्ली सरकार, दोनों के दावों की पोल खोल दी है।
दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री से लेकर सांसद तक मंचों पर खड़े होकर कह रहे कि “इन कॉलोनियों को राहत दी जाएगी, एक भी ईंट नहीं टूटेगी, किसी को उजाड़ा नहीं जाएगा।”… pic.twitter.com/kZge5bb2tI
— Sanjeev Jha (@Sanjeev_aap) June 25, 2026
पुनर्वास को लेकर उठी मांग
सांसद संजीव झा ने केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों से अपील की है कि प्रभावित परिवारों के लिए जल्द से जल्द एक स्पष्ट और ठोस पुनर्वास योजना प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीन पर लागू होने वाली नीति की आवश्यकता है।
जनता के जीवन पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों के जीवन पर इस स्थिति का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। रोज़गार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय निवासियों ने भी सरकार से अपील की है कि किसी भी कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास और सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जाए।

