वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 15 साल 118 दिन की उम्र में टी20 इंटरनेशनल अर्धशतक लगाकर सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ इतिहास रचा।
भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतिहास रच दिया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में उन्होंने महज 15 साल 118 दिन की उम्र में शानदार अर्धशतक लगाकर महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
वैभव अब दुनिया के सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उनकी इस ऐतिहासिक पारी ने क्रिकेट जगत में उनकी प्रतिभा और क्षमता को साबित कर दिया है।
19 गेंदों में पूरा किया तूफानी अर्धशतक
हरारे में खेले गए मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 19 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया।
इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ अपने शुरुआती अंतरराष्ट्रीय मैचों में वैभव का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था और उनकी सबसे बड़ी पारी 15 रन की थी। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ इस यादगार पारी ने उनकी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
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सचिन तेंदुलकर का पुराना रिकॉर्ड टूटा
वैभव सूर्यवंशी ने सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में फिफ्टी लगाने के मामले में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया है।
सचिन तेंदुलकर ने वर्ष 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद टेस्ट मैच में 16 साल 213 दिन की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाया था। उनका यह रिकॉर्ड कई वर्षों तक कायम रहा।
सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज
वैभव सूर्यवंशी (भारत) – 15 साल 118 दिन
सचिन तेंदुलकर (भारत) – 16 साल 213 दिन
शाहिद अफरीदी (पाकिस्तान) – 16 साल 214 दिन
मुश्ताक मोहम्मद (पाकिस्तान) – 17 साल 39 दिन
मोहम्मद अशरफुल (बांग्लादेश) – 17 साल 63 दिन
भारतीय क्रिकेट को मिला नया युवा सितारा
वैभव सूर्यवंशी की इस ऐतिहासिक पारी के बाद क्रिकेट विशेषज्ञों की नजरें उनके भविष्य के प्रदर्शन पर टिक गई हैं। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली प्रदर्शन करना उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
युवा बल्लेबाज की आक्रामक शैली को देखते हुए माना जा रहा है कि वह आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा नाम बन सकते हैं।
वैभव की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और आने वाले वर्षों में देश को कई शानदार खिलाड़ी मिल सकते हैं।

