TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर EC की अंतरिम रोक के बाद बंगाल की राजनीति गरमाई। जानें राहुल गांधी की प्रतिक्रिया, दोनों गुटों का विवाद और उपचुनाव पर असर।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी और दूसरे प्रतिद्वंद्वी गुट को आगामी उपचुनावों में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
यह फैसला पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले 6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले आया है। आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने का निर्देश दिया है।
चुनाव आयोग ने क्यों लिया यह फैसला?
चुनाव आयोग के अनुसार, उसके सामने उपलब्ध दस्तावेजों और दावों से यह सामने आया कि तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं और दोनों खुद को वास्तविक पार्टी प्रतिनिधि बता रहे हैं।
आयोग ने कहा कि आगामी उपचुनाव से पहले इस विवाद का अंतिम निपटारा करना संभव नहीं था। इसलिए अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को समान स्थिति में रखने के लिए पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
आयोग ने दोनों गुटों से 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक नाम और मुक्त चुनाव चिह्नों की तीन-तीन पसंद देने को कहा था। इसके बाद उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और प्रतीक आवंटित किए जाने हैं।
ममता बनर्जी गुट को बड़ा झटका
चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश का सीधा असर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट पर पड़ा है। पार्टी का पारंपरिक चुनाव चिह्न और आधिकारिक नाम लंबे समय से उसकी चुनावी पहचान का हिस्सा रहा है।
ममता बनर्जी गुट ने आयोग के आदेश का विरोध किया है और अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पार्टी की ओर से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प भी आयोग को भेजे गए हैं।
दूसरे गुट ने आयोग के आदेश का पालन करने की बात कही है और खुद को तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधि बताया है। दोनों पक्षों के बीच पार्टी के संगठन और नेतृत्व को लेकर विवाद जारी है।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसले पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे व्यापक लोकतांत्रिक मुद्दे से जोड़ा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पहले शिवसेना और एनसीपी के मामलों में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद सामने आया और अब तृणमूल कांग्रेस के साथ भी ऐसी स्थिति बनी है। उन्होंने चुनाव आयोग और बीजेपी पर मिलीभगत का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं है, बल्कि उन सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का मुद्दा है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। ये आरोप राहुल गांधी के राजनीतिक बयान हैं। चुनाव आयोग ने अपने आदेश में अपने फैसले का आधार दोनों गुटों के दावों और उपलब्ध दस्तावेजों को बताया है।
कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना की। उन्होंने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बीजेपी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को समान स्थिति में रखना और आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
क्या दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न मिलेंगे?
हां। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और मुक्त चुनाव चिह्न दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
आयोग ने दोनों पक्षों को अपनी पसंद के तीन नाम और तीन चुनाव चिह्न देने को कहा था। जरूरत पड़ने पर वे अपने नए नाम में मूल पार्टी से संबंध का उल्लेख भी कर सकते हैं। 18 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों ने आयोग के निर्देश के तहत अपने विकल्प जमा कर दिए हैं।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव पर पड़ेगा असर
इस विवाद का सबसे तत्काल प्रभाव नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव पर दिखाई देगा। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है।
अब मतदाताओं को EVM पर तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के बजाय संबंधित गुटों को आवंटित नए नाम और प्रतीक दिखाई देंगे।
इस बदलाव से चुनावी पहचान और प्रचार की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है, लेकिन इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव उपचुनाव के दौरान मतदाताओं की प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट होगा।
टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला कब?
फिलहाल चुनाव आयोग का फैसला अंतरिम प्रकृति का है। इसका उद्देश्य आगामी उपचुनावों के दौरान दोनों गुटों के लिए चुनावी व्यवस्था करना है।
पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किस गुट को मिलेगा, इस पर आगे की प्रक्रिया और दोनों पक्षों के दावों की जांच के बाद फैसला होना है। आयोग ने अपने आदेश में दोनों पक्षों के बीच विवाद को औपचारिक रूप से दर्ज करते हुए चुनाव चिह्न संबंधी नियमों के तहत अंतरिम व्यवस्था की है।
क्यों महत्वपूर्ण है चुनाव आयोग का यह आदेश?
तृणमूल कांग्रेस के लिए पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न उसकी चुनावी पहचान के प्रमुख हिस्से हैं। ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा।
फिलहाल नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग दोनों गुटों को कौन से नाम और चुनाव चिह्न आवंटित करता है और पार्टी के मूल नाम व आरक्षित चुनाव चिह्न को लेकर आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

