RBI ने Tata Motors Passenger Vehicles पर 2015 के FEMA उल्लंघन मामले में 2 लाख रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क लगाया। कंपनी ने निवेश ढांचा 2022 में खत्म कर दिया था।
टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Motors Passenger Vehicles Limited से जुड़ी एक पुरानी नियामकीय कार्रवाई सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी को 2015 के एक विदेशी निवेश मामले में FEMA नियमों से जुड़े उल्लंघन के लिए 2 लाख रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क जमा करने का निर्देश दिया है।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि RBI के विदेशी मुद्रा विभाग ने 20 अगस्त 2026 को इस मामले में कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया। यह मामला करीब 11 साल पुराने निवेश ढांचे से संबंधित है।
2015 के निवेश मामले में क्या हुआ था?
मामला साल 2015 में बनाए गए एक ODI-FDI स्ट्रक्चर से जुड़ा है। कंपनी के अनुसार, उस समय एक विदेशी इकाई के माध्यम से भारत में मौजूद एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी रखी गई थी।
कंपनी के मुताबिक, इस निवेश के लिए RBI की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। नियामक ने इसे Foreign Exchange Management (Transfer or Issue of Any Foreign Security) Regulations, 2004 के Regulation 5(1) से जुड़ा उल्लंघन माना। इसी मामले को निपटाने के लिए RBI ने कंपनी पर 2 लाख रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क निर्धारित किया है।
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कंपनी ने खुद किया था कंपाउंडिंग के लिए आवेदन
यह मामला किसी नए निवेश से संबंधित नहीं है। Tata Motors Passenger Vehicles ने स्पष्ट किया है कि यह एक पुराना compliance matter है।
कंपनी ने संबंधित अनुपालन को ठीक करने के लिए खुद RBI के पास कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल किया था। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने मामले पर आदेश जारी करते हुए शुल्क का भुगतान करने को कहा। FEMA के तहत कंपाउंडिंग प्रक्रिया का उद्देश्य कुछ विदेशी मुद्रा संबंधी उल्लंघनों को निर्धारित प्रक्रिया के जरिए निपटाना है।
मार्च 2022 में खत्म हो चुका है निवेश
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि जिस निवेश व्यवस्था को लेकर RBI की कार्रवाई हुई है, वह अब अस्तित्व में नहीं है।
Tata Motors Passenger Vehicles के अनुसार, संबंधित निवेश ढांचे से कंपनी मार्च 2022 में ही बाहर निकल चुकी थी। यानी वर्तमान समय में कंपनी के पास उस निवेश से जुड़ी कोई हिस्सेदारी नहीं है। इसलिए RBI की मौजूदा कार्रवाई को पुराने अनुपालन मामले के निपटारे के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या Tata Motors के कारोबार पर पड़ेगा असर?
2 लाख रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क कंपनी के कारोबार के लिहाज से बड़ा वित्तीय बोझ नहीं माना जा रहा है। मामला भी पुराने निवेश ढांचे से जुड़ा है, जिसे कंपनी पहले ही समाप्त कर चुकी है।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई एक पुराने FEMA compliance issue से संबंधित है और वर्तमान में ऐसा कोई निवेश मौजूद नहीं है।
क्या है FEMA?
FEMA यानी Foreign Exchange Management Act भारत में विदेशी मुद्रा और सीमा पार लेनदेन से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। इसके तहत विदेशी निवेश, भारत से बाहर निवेश और विदेशी मुद्रा से जुड़े कई लेनदेन के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं।
ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई या कंपाउंडिंग की जा सकती है।
निवेशकों को क्या समझना चाहिए?
Tata Motors Passenger Vehicles पर हुई यह कार्रवाई मुख्य रूप से एक पुराने विदेशी निवेश अनुपालन मामले से जुड़ी है। कंपनी के मुताबिक, संबंधित निवेश को 2022 में समाप्त किया जा चुका है और उसने स्वयं इस मामले को नियमित करने के लिए RBI की प्रक्रिया अपनाई थी।
इसलिए इस खबर का मुख्य पहलू FEMA compliance और पुराने निवेश ढांचे का निपटारा है, न कि कंपनी के मौजूदा कारोबारी संचालन पर किसी बड़े प्रतिबंध की जानकारी।

