सावन पुत्रदा एकादशी 2026: पुत्रदा एकादशी पर चावल खाने, तुलसी तोड़ने, बाल-नाखून काटने समेत 5 कामों से बचने की धार्मिक मान्यता है।
सावन पुत्रदा एकादशी 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के लिए विशेष माना जाता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को सावन पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत, पूजा और धार्मिक नियमों का पालन करने की परंपरा है।
पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 को सुबह करीब 2 बजे शुरू होकर 24 अगस्त को सुबह 4:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन कुछ कार्यों से परहेज करना चाहिए। आइए जानते हैं वे कौन से काम हैं।
1. एकादशी पर चावल खाने से बचें
धार्मिक परंपरा में एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। व्रत रखने वाले लोग आमतौर पर चावल और अनाज का सेवन नहीं करते हैं। कुछ परंपराओं में व्रत न रखने वाले लोगों को भी एकादशी के दिन चावल से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
2. एकादशी के दिन तुलसी न तोड़ें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए।
अगर पूजा के लिए तुलसी की आवश्यकता हो तो इसे एक दिन पहले तोड़कर रख लेने की परंपरा है। माना जाता है कि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे के प्रति विशेष सम्मान रखा जाता है।
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3. बाल और नाखून काटने से बचें
पुत्रदा एकादशी के दिन बाल और नाखून काटना भी कई धार्मिक परंपराओं में उचित नहीं माना जाता। एकादशी को संयम, साधना और पूजा का दिन माना जाता है, इसलिए ऐसे कामों को टालने की सलाह दी जाती है। अगर इसकी आवश्यकता हो तो बाल और नाखून एकादशी से पहले या बाद में काटे जा सकते हैं।
4. किसी जीव को नुकसान न पहुंचाएं
एकादशी के दिन अहिंसा और दया का पालन करने पर जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किसी जीव को नुकसान पहुंचाने या हिंसा करने से बचना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और पशु-पक्षियों के प्रति दया रखना इस दिन की धार्मिक भावना से जुड़ा माना जाता है।
5. झूठ और गलत कामों से रहें दूर
एकादशी व्रत का उद्देश्य केवल भोजन से परहेज करना नहीं माना जाता, बल्कि विचारों और व्यवहार में भी संयम रखना महत्वपूर्ण बताया गया है।
इस दिन झूठ बोलने, विवाद करने, किसी का अपमान करने, छल-कपट करने और दूसरों को नुकसान पहुंचाने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मन, वाणी और कर्मों की शुद्धता भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पुत्रदा एकादशी का क्या है धार्मिक महत्व?
सावन पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से संतान सुख की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है।
कई श्रद्धालु इस दिन परिवार की सुख-शांति, संतान की खुशहाली और समृद्धि के लिए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।

