राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीनचिट पर संजय सिंह ने सवाल उठाए। निष्पक्ष जांच न होने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही।
अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रिपोर्ट में पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम नहीं होने की खबरों के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाए हैं।
संजय सिंह ने कहा है कि अगर जांच निष्पक्ष नहीं हुई तो वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। उन्होंने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसआईटी की पुरानी रिपोर्ट के एक कथित गायब पन्ने का भी जिक्र किया और जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
एसआईटी रिपोर्ट को लेकर क्या बोले संजय सिंह?
संजय सिंह का कहना है कि 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच में तेजी लाने और रिपोर्ट पेश करने को कहा था। इसके बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीनचिट मिलने की खबरें सामने आईं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
‘क्लीनचिट कैसे मिल सकती है?’
आप नेता ने पूर्व में गठित एसआईटी की रिपोर्ट के कथित ‘पन्ना नंबर 6’ को सार्वजनिक करने का दावा किया। उनके मुताबिक, इस हिस्से में ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों की भूमिका और बैंकिंग प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का उल्लेख है।
संजय सिंह ने सवाल किया कि अगर पुरानी रिपोर्ट में जिम्मेदारियों को लेकर सवाल उठाए गए थे, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा को मौजूदा एसआईटी रिपोर्ट में क्लीनचिट कैसे मिल सकती है।
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चंदे और चढ़ावे को लेकर भी लगाए आरोप
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मामला केवल जमीन से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं है। उन्होंने मंदिर में आने वाले चंदे, चढ़ावे और अन्य संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
हालांकि, इन आरोपों को संजय सिंह के राजनीतिक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध एसआईटी रिपोर्ट से जुड़े समाचारों में चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है।
अनिल मिश्रा को लेकर क्या स्थिति है?
इस मामले में रिपोर्टिंग पूरी तरह एक जैसी नहीं है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक अंतिम एसआईटी रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों का नाम नहीं है और दोनों को क्लीनचिट दी गई है।
वहीं, द प्रिंट की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि चंपत राय के खिलाफ कथित चोरी में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं मिली, जबकि अनिल मिश्रा को लेकर जांच के कुछ पहलुओं पर सवाल बने हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने की बात
संजय सिंह ने कहा है कि यदि उन्हें जांच में पारदर्शिता नहीं दिखी तो वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग स्वीकार नहीं की थी और रिपोर्ट को सीलबंद रखने का फैसला किया था।
आगे क्या होगा?
एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपी जा चुकी है। अब इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

