Punjab School Holiday: 3 सितंबर को बठिंडा, मानसा और बरनाला के प्राइवेट स्कूल बंद रहेंगे। स्कूल बस ऑपरेटरों की महापंचायत के चलते लिया गया फैसला।
Punjab School Holiday: पंजाब में 3 सितंबर, गुरुवार को तीन जिलों के निजी स्कूलों में छुट्टी रहने की जानकारी सामने आई है। बठिंडा, मानसा और बरनाला के प्राइवेट स्कूल इस दिन बंद रह सकते हैं। यह फैसला स्कूल बस और वैन ऑपरेटरों की ओर से आयोजित की जा रही राज्य स्तरीय महापंचायत को देखते हुए लिया गया है।
दरअसल, पंजाब के निजी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े बस ऑपरेटरों ने 3 सितंबर को बठिंडा में बड़ी महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया है। इस कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से स्कूल बसों के मालिक, ड्राइवर और कंडक्टर शामिल होने वाले हैं। ऐसे में स्कूलों की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए तीन जिलों के निजी स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
स्कूल बस ऑपरेटरों की महापंचायत क्यों?
फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशन ऑफ पंजाब (FAP) की ओर से स्कूल बस और वैन संचालकों की मांगों को लेकर इस महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि स्कूल बस और वैन ऑपरेटरों के सामने प्रशासन की ओर से लागू किए गए कई नियमों को लेकर लंबे समय से समस्याएं बनी हुई हैं।
फेडरेशन के अध्यक्ष जगजीत सिंह धूर के मुताबिक, स्कूल बस ऑपरेटरों की मांगों को लेकर 3 सितंबर को बठिंडा में राज्य स्तरीय महापंचायत बुलाई गई है। इसमें पंजाब के विभिन्न हिस्सों से जुड़े बस मालिक, ड्राइवर और कंडक्टर हिस्सा लेंगे।
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अनाज मंडी में जुटेंगे बस और वैन ऑपरेटर
पंजाब स्कूल और कॉलेज प्राइवेट बस ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सरां ने बताया कि अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने के लिए बठिंडा की अनाज मंडी में महापंचायत आयोजित की जा रही है। उनका दावा है कि प्रदेशभर से बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग इस कार्यक्रम में पहुंचेंगे।
उन्होंने कहा कि स्कूल बस ऑपरेटर काफी समय से अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि स्कूल बसों के माध्यम से लाखों बच्चों को रोजाना स्कूल पहुंचाया जाता है और इस व्यवस्था से हजारों ड्राइवर व कंडक्टर जुड़े हुए हैं।
छोटी स्कूल बसों के लिए अलग ट्रांसपोर्ट पॉलिसी की मांग
बस ऑपरेटरों का कहना है कि बड़ी कमर्शियल बसों और स्कूलों में चलने वाली छोटी बसों के लिए एक जैसी नीतियां लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उनके मुताबिक, स्कूल बसें आमतौर पर सीमित दूरी तक बच्चों को लाने-ले जाने का काम करती हैं, जबकि अन्य बसें लंबी दूरी तय करती हैं।
ऑपरेटरों ने छोटी स्कूल बसों के लिए अलग ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बनाए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए नियमों में बदलाव किया जाना चाहिए।
टैक्स और बसों की उम्र को लेकर भी मांग
स्कूल बस ऑपरेटरों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें ट्रांसपोर्ट पॉलिसी में बदलाव, सड़कों पर आरटीओ की ओर से कथित परेशानी को कम करना, भारी टैक्स में राहत और टैक्स छूट जैसी मांगें शामिल हैं।
इसके अलावा ऑपरेटर बसों की निर्धारित उम्र सीमा को 15 साल से बढ़ाकर 25 साल करने की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार इन मुद्दों पर बातचीत कर समाधान निकालती है तो स्कूल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी।
मांगें नहीं मानी गईं तो बढ़ सकता है आंदोलन
बस ऑपरेटरों ने संकेत दिया है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर जल्द बातचीत नहीं करती है तो आंदोलन को आगे जिला स्तर तक ले जाया जा सकता है। उनका कहना है कि वे सरकार से टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
फिलहाल 3 सितंबर को होने वाली महापंचायत को लेकर स्कूल बस ऑपरेटरों में काफी सक्रियता है। बठिंडा, मानसा और बरनाला में निजी स्कूलों के बंद रहने की वजह भी इसी कार्यक्रम के कारण प्रभावित होने वाली स्कूल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को बताया जा रहा है।

