भारत और अमेरिका के बीच हुए अहम व्यापार समझौते के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। NDA संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “इस सदी में भारत का दुनिया के सेंटर स्टेज पर आना सबसे बड़ी घटना है।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज वैश्विक संतुलन में भारत की भूमिका निर्णायक हो चुकी है और दुनिया भारत को गंभीरता से सुन रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले जहां भारत को वैश्विक फैसलों में हाशिये पर रखा जाता था, वहीं अब भारत नीतियां गढ़ने वाले देशों में शामिल है। उन्होंने कहा, “आज दुनिया में भारत की पूछ है। भारत केवल बाजार नहीं, बल्कि भरोसेमंद साझेदार बन चुका है।”
टैरिफ विवाद पर विपक्ष पर तंज
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विपक्ष पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर चर्चा चल रही थी, तब कुछ लोग पहले ही टूट गए थे। “भारत पर टैरिफ लगते ही विपक्ष सवाल उठाने लगा, लेकिन अब वही लोग समझ रहे हैं कि भारत कितनी मजबूती से अपने हितों की रक्षा कर रहा है,” पीएम ने कहा।
सांसदों को मिला साफ टास्क: एक्सपोर्ट और क्वालिटी
बैठक में प्रधानमंत्री ने NDA सांसदों को देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने का स्पष्ट रोडमैप भी दिया। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में निर्यात की संभावनाओं (Export Potential) का गहराई से अध्ययन करें। इसके साथ ही स्थानीय उद्योगों और मैन्युफैक्चरर्स के साथ बैठकें और सम्मेलन आयोजित करने का सुझाव दिया।
पीएम मोदी ने विशेष रूप से क्वालिटी पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में भारत की पहचान तभी मजबूत होगी, जब हमारे उत्पाद विश्वस्तरीय होंगे। उन्होंने एक कहावत का जिक्र करते हुए कहा,
“पत्थर पर लकीर खींचने की आदत हमें नहीं छोड़नी चाहिए,”
अर्थात् भारत को अपने फैसलों पर दृढ़ रहना होगा और सुधारों को लगातार आगे बढ़ाना होगा।
केरल की जीत और सादनंदन मास्टर की प्रेरक कहानी
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने केरल में बीजेपी की स्थानीय चुनावी सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने राज्यसभा सांसद सी. सादनंदन मास्टर की बहादुरी को सभी के सामने उदाहरण के रूप में रखा। पीएम ने बताया कि कैसे उनका पैर काट दिया गया था, लेकिन उन्होंने कृत्रिम पैर लगाकर न सिर्फ जीवन को आगे बढ़ाया, बल्कि मजबूती से राजनीतिक संघर्ष भी जारी रखा।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हम आज जहां खड़े हैं, वह हमारी मेहनत और कार्यकर्ताओं की तपस्या का परिणाम है, किसी तीसरी शक्ति की कृपा से नहीं।” यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास और संघर्ष की भावना को मजबूत करने वाला रहा।
भारत को वैश्विक ताकत बनाने की अपील
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने सांसदों से अपील की कि वे निर्यात, निवेश और गुणवत्ता के जरिए भारत की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि भारत के पास अवसरों की कमी नहीं है, जरूरत है उन्हें सही दिशा में बदलने की।
प्रधानमंत्री का यह संदेश साफ करता है कि आने वाले वर्षों में सरकार का फोकस भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने पर रहेगा, जहां “मेक इन इंडिया” और “एक्सपोर्ट फर्स्ट” नीति अहम भूमिका निभाएगी।

