Masan Holi 2025: चिता की राख से मसान होली, भगावन शिव की नगरी काशी में खेली जाती है। काशी में मसान की होली बहुत प्रसिद्ध है। आइए जानें क्यों काशी में मसान की होली खेली जाती है। कैसे काशी में होली खेलने की परंपरा शुरू हुई?
Masan Holi 2025: शिव की नगरी काशी, माना जाता है कि ये शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर बना है। काशी में मसान की होली होती है। प्रयागराज में महाकुंभ के समाप्त होने के बाद, नागा साधु भी शिव की नगरी में मसान की खोली खेलने आए हैं। ये होली बहुत अलग है। मृत्यु, मोक्ष और शिव भक्ति इस होली से जुड़े हुए हैं।
काशी के मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट में ये होली अक्सर खेली जाती है। ये दोनों शमशान स्थल हैं। शमशान स्थलों पर साधु और शिवजी के लोग मिलकर मसान होली खेलते हैं. वे चिता की राख से होली खेलते हैं। काशी में इस साल मसान की होली कब मनाई जाएगी? मसान की होली खेलने की परंपरा का इतिहास विस्तार से जानें।
कब मसान की होली खेली जाएगी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, रंगों की होली इस साल 14 मार्च 2025 को होगी। काशी में रंगभरी एकादशी के एक दिन बाद मसान की होली खेली जाती है। 10 मार्च रंगभरी एकादशी है। ऐसे में 11 मार्च को इस वर्ष मसान की होली होगी।
मसान होली खेलने का रिवाज
भगवान शिव और शमशान दोनों मसान की होली से जुड़े हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों में भगवान शिव को मोक्ष और संहार के देवता बताया गया है। भगवान शिव शमशान में रहते हैं। भगवान शिव को शमशान बहुत प्रिय है। शिव भगवान शमशान में नृत्य करते हुए होली खेलते हैं। मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान ने गुलाल से होली खेली, लेकिन उन्होंने भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व या प्रेत के साथ नहीं खेली। यही कारण है कि मसान की होली रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन मनाई जाती है।
मणिकर्णिका मंदिर मोक्ष का प्रवेशद्वार है
मणिकर्णिका घाट को काशी में मोक्ष का द्वार कहा जाता है। माना जाता है कि यहाँ भगवान शिव मोक्ष देते हैं। यहां रंगभरी एकादशी के अगले दिन चिता की राख से होली खेलते हैं। शिवालयों को विशेष रूप से पूजा जाता है। गुलाल और भस्म को उड़ाया जाता है। इस दौरान तांडव नृत्य होता है और भगवान शिव के भजन गाए जाते हैं।
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