जयपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर श्रद्धांजलि, वंचितों के उत्थान और सामाजिक न्याय के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
राजस्थान की राजधानी Jaipur में संविधान के शिल्पकार और ज्ञान के प्रतीक Dr. Bhimrao Ambedkar की 135वीं जयंती बड़े सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शहर में स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को समाज के लिए मार्गदर्शक बताया और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता का प्रतीक रहा है। उन्होंने समाज के शोषित और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए जो कार्य किए, वे आज भी प्रेरणादायक हैं। उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग न केवल सामाजिक न्याय की नींव रखता है, बल्कि एक समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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सरकार ने इस मौके पर यह दोहराया कि बाबा साहेब के सपनों को साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। वंचित, दलित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं और नीतियों के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकता साफ तौर पर इन वर्गों के विकास पर केंद्रित है, ताकि हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि डॉ. अंबेडकर के विचार आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गए हैं, जब समाज को एकजुटता, समानता और न्याय की सबसे अधिक आवश्यकता है। उनके सिद्धांतों को अपनाकर ही एक मजबूत और समावेशी भारत का निर्माण संभव है।
कुल मिलाकर, जयपुर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल बाबा साहेब को श्रद्धांजलि देने का अवसर था, बल्कि उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और उन्हें जीवन में अपनाने का संदेश भी था। इस मौके पर लोगों ने संकल्प लिया कि वे उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में समानता, भाईचारा और न्याय को मजबूत करेंगे।

