हरियाणा में अनुदान उपयोगिता प्रमाण पत्र का मानक प्रारूप लागू, अब सभी संस्थानों को एक समान फॉर्मेट में देना होगा हिसाब।
हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate – UC) के लिए एक मानक प्रारूप लागू करने को मंजूरी दी गई है।
नियमों में किया गया संशोधन
इस फैसले के तहत हरियाणा वित्तीय नियम, खंड-1 के नियम 8.14 (ख) में संशोधन किया गया है।
अब राज्य में अनुदान प्राप्त करने वाले सभी संस्थानों को एक तय फॉर्मेट में UC प्रस्तुत करना होगा।
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पहले क्या थी समस्या?
अब तक:
- UC का कोई एक समान फॉर्मेट नहीं था
- अलग-अलग विभाग अलग तरीके से रिपोर्ट देते थे
- इससे डेटा में असंगति और पारदर्शिता की कमी सामने आती थी
नया मानक प्रारूप क्या बदलेगा?
🔹 एकरूपता और स्पष्टता
- सभी विभाग, बोर्ड, निगम, स्थानीय निकाय और सहकारी संस्थाएं
- एक ही फॉर्मेट में रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी
🔹 जवाबदेही तय
- अनुदान स्वीकृत करने वाले अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि
👉 सभी शर्तों का पालन हुआ है
🔹 तय समय पर रिपोर्टिंग
- UC को निर्धारित अंतराल पर
- प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं पात्रता) के साथ सहमति से जमा करना होगा
🔹 मजबूत सत्यापन तंत्र
- रिकॉर्ड का उचित रखरखाव
- सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स अनिवार्य
- ऑडिट और निरीक्षण की व्यवस्था
क्या होगा फायदा?
इस बदलाव के बाद:
- सरकारी फंड के उपयोग पर बेहतर निगरानी होगी
- अनियमितताओं पर रोक लगेगी
- ऑडिट प्रक्रिया आसान और प्रभावी बनेगी
- वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा
विशेषज्ञों की नजर में फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम:
👉 गवर्नेंस सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाएगा
👉 सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की संभावना कम करेगा
👉 और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करेगा
निष्कर्ष
हरियाणा सरकार का यह फैसला राज्य में फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम को आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अब हर अनुदान का हिसाब एक समान और पारदर्शी तरीके से सामने आएगा, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और मजबूत होगी।

