हरियाणा में निकाय और पंचायत चुनाव 2026 के लिए नामांकन खत्म, 10 मई को मतदान, कई सीटों पर निर्विरोध उम्मीदवार चुने गए।
हरियाणा में नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 2026 को लेकर चुनावी प्रक्रिया ने अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है। हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार अप्रैल-मई 2026 में होने वाले इन चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, जबकि मतदान 10 मई 2026 को आयोजित होगा।
नगर निकाय चुनावों की बात करें तो अंबाला और पंचकूला नगर निगम में मुकाबला रोचक हो गया है। अंबाला नगर निगम के मेयर पद पर अब तीन महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि वार्ड सदस्य पदों के लिए 65 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशी शामिल हैं। पंचकूला में मेयर पद के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में हैं और 87 उम्मीदवार वार्ड सदस्य पद के लिए चुनावी मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।
रेवाड़ी नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए सभी उम्मीदवार महिलाएं हैं, जो इस चुनाव को खास बनाता है। वहीं धारूहेड़ा, सांपला और उकलाना नगरपालिकाओं में भी अध्यक्ष और सदस्य पदों के लिए कई उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसके अलावा टोहाना, झज्जर, राजौंद, तरावड़ी, कनीना और सढौरा में उपचुनाव के तहत वार्ड स्तर पर भी चुनाव कराए जा रहे हैं, जहां कुल 14 उम्मीदवार मैदान में हैं।
पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में भी कई जिलों में दिलचस्प स्थिति देखने को मिल रही है। कई स्थानों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन हुआ है, जबकि कई सीटों पर नामांकन ही नहीं आने से पद रिक्त रह गए हैं। अंबाला, भिवानी, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम, जींद, झज्जर, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर सहित कई जिलों में सरपंच और पंच पदों पर मिश्रित स्थिति देखने को मिल रही है।
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कई जिलों में बड़ी संख्या में पंच पदों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर सहमति और सामाजिक संतुलन को दर्शाता है। वहीं कुछ क्षेत्रों में नामांकन नहीं मिलने से यह भी संकेत मिलता है कि ग्रामीण स्तर पर राजनीतिक भागीदारी को और बढ़ाने की जरूरत है।
चुनाव आयोग के अनुसार, सभी जिलों में प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मतदान केंद्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव न केवल स्थानीय निकायों के नेतृत्व को तय करेगा बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी प्रभाव डालेगा। खासतौर पर नगर निकायों में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा, जबकि पंचायत चुनावों में स्थानीय समीकरण अधिक प्रभावी रहेंगे।
हरियाणा में इन चुनावों को लोकतंत्र के जमीनी स्तर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर 10 मई को होने वाले मतदान और उसके परिणामों पर टिकी है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति और विकास की दिशा तय करेंगे।

