हरियाणा ने फॉरेंसिक जांच के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए वैज्ञानिक रूप से मजबूत, तीन-स्तरीय फॉरेंसिक जांच प्रोटोकॉल स्थापित किया है, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक के रूप में उभर रहा है। इस उन्नत प्रोटोकॉल के माध्यम से राज्य ने 99 प्रतिशत की अभूतपूर्व डीएनए पॉजिटिविटी दर हासिल की है, जो देश में सर्वोच्च उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) डॉ. सुमित मिश्रा ने बताया कि यह तीन-स्तरीय फॉरेंसिक प्रोटोकॉल जांच की पारदर्शिता, वैज्ञानिक सटीकता और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करता है। इससे न केवल अपराधों की त्वरित और सटीक पहचान संभव हुई है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूती मिली है।
डॉ. मिश्रा के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत साक्ष्यों के संग्रहण, परीक्षण और विश्लेषण की पूरी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया गया है। इससे फॉरेंसिक रिपोर्ट्स की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अपराधियों को सजा दिलाने की दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हरियाणा का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है। फॉरेंसिक जांच में तकनीक, प्रशिक्षण और प्रक्रियाओं के समन्वित उपयोग से राज्य ने यह सिद्ध कर दिया है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

