हरियाणा महाधिवक्ता कार्यालय पूरी तरह डिजिटल बन गया है, जिससे अब सभी विधिक कार्य तेज, पारदर्शी और आधुनिक प्रणाली के तहत संचालित होंगे।
हरियाणा ने प्रशासनिक और विधिक सुधारों की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश का पहला पूर्ण डिजिटल महाधिवक्ता कार्यालय बनने का गौरव प्राप्त किया है। राज्य के महाधिवक्ता प्रविंद्रा सिंह चौहान के नेतृत्व में महाधिवक्ता कार्यालय को पूरी तरह आधुनिक डिजिटल प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया है, जिससे अब सभी विधिक कार्य बिना कागजी प्रक्रिया के डिजिटल माध्यम से संचालित होंगे।
गुरुवार को महाधिवक्ता प्रविंद्रा सिंह चौहान ने प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम को औपचारिक रूप से शुरू करते हुए इस नई व्यवस्था को जनता और विभागों के लिए लाइव किया। इस अवसर को हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महाधिवक्ता ने बताया कि यह डिजिटल व्यवस्था केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि विधिक कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार का हिस्सा है। इस नई प्रणाली के माध्यम से सरकारी विभागों और महाधिवक्ता कार्यालय के बीच सभी प्रकार का पत्राचार, कानूनी राय, मुकदमों की निगरानी और दस्तावेजों का आदान-प्रदान पूरी तरह डिजिटल तरीके से किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस प्रणाली का मुख्य आधार प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम है, जो पुराने मुकदमा प्रबंधन तंत्र का आधुनिक और उन्नत स्वरूप है। इससे मुकदमों से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक देरी समाप्त होगी।
नई डिजिटल व्यवस्था के तहत अब सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे पेपर बुक, जवाब, लिखित बयान और अदालतों के आदेश पीडीएफ स्वरूप में सुरक्षित रखे जाएंगे। इससे कागजी फाइलों पर निर्भरता लगभग समाप्त हो जाएगी और दस्तावेजों तक तुरंत पहुंच संभव हो सकेगी।
महाधिवक्ता प्रविंद्रा सिंह चौहान ने कहा कि इस पहल से हरियाणा ने देश में विधिक संस्थाओं के आधुनिकीकरण का नया मानक स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव राज्य की तकनीकी सोच, प्रशासनिक क्षमता और पारदर्शी शासन व्यवस्था का प्रतीक है।
इस डिजिटल परिवर्तन की शुरुआत लगभग छह माह पहले हुई थी, जब वरिष्ठ उप महाधिवक्ता अरुण तेवतिया को सूचना प्रौद्योगिकी और सुरक्षा प्रकोष्ठ का नोडल अधिकारी तथा कंप्यूटर समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्हें कार्यालय की पारंपरिक मैनुअल व्यवस्था को पूर्ण डिजिटल प्रणाली में बदलने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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इसके बाद मिशन मोड में काम शुरू किया गया और चरणबद्ध तरीके से विभिन्न आधुनिक डिजिटल मॉड्यूल विकसित किए गए। वरिष्ठ उप महाधिवक्ता अरुण तेवतिया ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत कई आधुनिक ई-प्रशासन मॉड्यूल लागू किए गए हैं, जो विधिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाएंगे।
नई प्रणाली के अंतर्गत ई-रोस्टर मॉड्यूल से विधि अधिकारियों को उनके खाते पर तुरंत दस्तावेज उपलब्ध होंगे। ई-निर्णय प्रणाली के माध्यम से अदालतों के फैसलों और आदेशों तक तुरंत पहुंच संभव होगी। वहीं ई-जांच प्रणाली कानूनी जांच और समीक्षा प्रक्रिया को तेज और सरल बनाएगी।
इसके अतिरिक्त ई-राय प्रणाली के माध्यम से विभिन्न विभागों को समय पर कानूनी सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। ई-पैरवी मॉड्यूल केस प्रस्तुति और सारांश को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाएगा।
कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को भी डिजिटल बनाया गया है। ई-आगंतुक पास प्रणाली के तहत सात स्तरीय सुरक्षा वाली क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है, जिससे आगंतुकों की निगरानी अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो सकेगी।
इसी प्रकार ई-संगठन चार्ट के माध्यम से सभी विधि अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगी। वहीं ई-डैशबोर्ड प्रणाली पर हरियाणा से जुड़े सभी मामलों की वास्तविक समय की जानकारी देखी जा सकेगी, जिसमें तत्काल, सामान्य और अदालतवार मामलों का पूरा विवरण शामिल होगा।
इसके अलावा ई-निर्देशिका प्रणाली के तहत सभी सरकारी विभागों के नोडल अधिकारियों का संपर्क विवरण एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे विभागीय समन्वय और संवाद अधिक तेज और आसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा की यह पहल देशभर की विधिक संस्थाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है। इससे न केवल कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति आएगी, बल्कि सरकारी मुकदमों के प्रबंधन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
राज्य सरकार का कहना है कि आने वाले समय में अन्य विभागों में भी इसी प्रकार की डिजिटल व्यवस्थाओं को लागू किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सके।

