हरियाणा चुनाव 2026 को निष्पक्ष बनाने के लिए देवेंद्र सिंह कल्याण ने EVM सुरक्षा, व्यय नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए।
हरियाणा में आगामी नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, और इसी कड़ी में देवेंद्र सिंह कल्याण ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पंचकूला स्थित हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों के साथ समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक में देवेंद्र सिंह कल्याण ने निर्देश दिए कि सभी पर्यवेक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था पर लगातार नजर रखें और संवेदनशील तथा अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करें। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए नकदी, शराब, कपड़े या अन्य प्रलोभनों के वितरण पर विशेष नजर रखी जाए और ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही अवैध हथियारों और आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
ईवीएम मशीनों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। देवेंद्र सिंह कल्याण ने कहा कि जिन स्थानों पर EVM मशीनें रखी गई हैं, वहां चौबीसों घंटे सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही मतदान कर्मियों और EVM की रैंडमाइजेशन प्रक्रिया पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में ही कराई जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे।
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जनसंपर्क और शिकायत निवारण को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए। पर्यवेक्षकों के ठहरने के स्थान और उनके संपर्क नंबरों को सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि आम नागरिक, उम्मीदवार और राजनीतिक दल अपनी शिकायत सीधे उनके पास दर्ज कर सकें। पर्यवेक्षक सभी पक्षों के लिए सुलभ रहेंगे और प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
व्यय निगरानी के संदर्भ में देवेंद्र सिंह कल्याण ने कहा कि प्रत्येक प्रत्याशी को अपने चुनाव खर्च का दिन-प्रतिदिन रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। इसमें वाहन, ईंधन, प्रचार सामग्री, विज्ञापन और अन्य गतिविधियों पर होने वाला खर्च शामिल होगा, जिसे निर्धारित सीमा के भीतर रखना जरूरी है। यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करता है या सही जानकारी प्रस्तुत नहीं करता, तो उसके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई की जा सकती है। व्यय पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर तीन दिन में उम्मीदवारों के खर्च का निरीक्षण करें और पूरी प्रक्रिया की निगरानी रखें।
इसके अलावा चुनाव के दौरान शराब की अवैध आपूर्ति और उपयोग पर रोक लगाने के लिए विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर नाकेबंदी कर कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। मतदान के बाद किसी भी प्रकार की हिंसा या अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत रिपोर्ट आयोग को भेजना अनिवार्य किया गया है।
देवेंद्र सिंह कल्याण ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यवेक्षक केवल राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों का ही पालन करेंगे और किसी अन्य प्राधिकरण से निर्देश नहीं लेंगे। किसी भी विशेष स्थिति में आयोग के निर्देश पर तुरंत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। आवश्यकता पड़ने पर मतगणना प्रक्रिया को रोकने या परिणाम घोषित न करने जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, हरियाणा में चुनाव 2026 को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उठाए गए ये कदम बेहद अहम माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है that पर्यवेक्षकों की सक्रिय भूमिका से मतदाताओं में विश्वास बढ़ेगा और चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने में मदद मिलेगी।

