पंजाब विधानसभा में हरपाल सिंह चीमा ने जसवंत सिंह खालरा मुद्दे पर अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली से सवाल किए और पूर्व अकाली-भाजपा सरकार पर वादे निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया।
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान जसवंत सिंह खालरा और कथित मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। इस दौरान राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि केवल वर्तमान में बयान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सत्ता में रहते हुए भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे।
अकाली दल-भाजपा सरकार पर साधा निशाना
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में सिख समुदाय के साथ कई गंभीर घटनाएं हुईं, जिनके पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की गठबंधन सरकार सत्ता में थी, तब उसने भी अपने चुनावी वादों के अनुरूप पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अकाली नेता आज जसवंत सिंह खालरा के मुद्दे पर मुखर हैं, तो अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने इस मामले को उसी गंभीरता से क्यों नहीं उठाया।
also read: गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व की तैयारियों की समीक्षा, मंत्री तरुणप्रीत…
मनप्रीत सिंह अयाली पर तीखी टिप्पणी
बहस के दौरान वित्त मंत्री ने मनप्रीत सिंह अयाली पर राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अब अपनी “सीट और रुख” दोनों बदल लिए हैं। चीमा ने आरोप लगाया कि अयाली एक संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने इस दिशा में ठोस पहल नहीं की।
चुनावी वादों पर भी उठाए सवाल
चीमा ने कहा कि अकाली दल-भाजपा गठबंधन ने अपने चुनावी घोषणापत्र में मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को न्याय दिलाने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद इन वादों को पूरा करने के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सकता, बल्कि इसके लिए ठोस और प्रभावी कार्रवाई जरूरी होती है।
विधानसभा में तेज हुई राजनीतिक बहस
जसवंत सिंह खालरा, बेअदबी के मामलों और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर विधानसभा में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की पूर्व सरकारों पर सवाल उठाते हुए पंजाब में न्याय, जवाबदेही और कानून व्यवस्था को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।

