भारत में लगातार बढ़ते सोने के आयात ने व्यापार घाटा, विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ा दिया है, जानिए अर्थव्यवस्था पर इसका पूरा असर।
भारत में सोने की बढ़ती मांग अब देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में सोने के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे, विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते के घाटे पर पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में लोगों से अनावश्यक सोने की खरीद टालने की अपील भी इसी आर्थिक दबाव की ओर इशारा करती है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत का सोना आयात वर्ष 2025-26 में बढ़कर 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा स्तर माना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 58 अरब डॉलर था, जबकि 2023-24 में 45.54 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। लगातार बढ़ते आयात ने सरकार और आर्थिक विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों बढ़ रहा है सोने का आयात?
भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। देश में सोने को सिर्फ आभूषण के रूप में ही नहीं बल्कि सुरक्षित निवेश के तौर पर भी देखा जाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के समय लोग सोने में निवेश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। यही वजह है कि बीते वर्षों में सोने की मांग तेजी से बढ़ी है।
इसके अलावा शादियों और त्योहारों में सोने की परंपरागत मांग भी लगातार बनी रहती है। भारत का विशाल आभूषण उद्योग भी सोने के आयात को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
बढ़ते आयात से अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ता है असर?
जब कोई देश ज्यादा मात्रा में आयात करता है और उसके मुकाबले निर्यात कम होता है, तो व्यापार घाटा बढ़ने लगता है। भारत के साथ भी यही स्थिति बन रही है। वर्ष 2025-26 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें सोने के आयात की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
सोने का आयात विदेशी मुद्रा में किया जाता है। इसका मतलब है कि भारत को बड़ी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। अगर विदेशी मुद्रा का भंडार कमजोर होता है तो इसका असर रुपये की मजबूती पर भी पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार चालू खाते का घाटा भी तेजी से बढ़ा है। अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के दौरान चालू खाते का घाटा बढ़कर 13.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.3 प्रतिशत है।
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किन देशों से आता है भारत में सबसे ज्यादा सोना?
भारत के लिए सोने का सबसे बड़ा स्रोत स्विट्जरलैंड है। देश के कुल सोना आयात में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात का स्थान आता है, जिसकी हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक है। दक्षिण अफ्रीका भी भारत को बड़ी मात्रा में सोना निर्यात करता है।
दिलचस्प बात यह है कि संयुक्त अरब अमीरात खुद बहुत ज्यादा सोना उत्पादन नहीं करता, फिर भी वहां से भारत में आयात तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई देशों का सोना दुबई के रास्ते भारत पहुंचाया जा रहा है ताकि कम आयात शुल्क का फायदा उठाया जा सके।
शुल्क में बदलाव का क्या असर पड़ा?
सरकार ने वर्ष 2022 में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था ताकि आयात कम हो और व्यापार घाटे पर नियंत्रण पाया जा सके। हालांकि बाद में वर्ष 2024-25 के बजट में इसे घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया गया ताकि आभूषण उद्योग को राहत मिल सके और तस्करी कम हो।
लेकिन शुल्क घटने के बाद सोने का आयात और तेजी से बढ़ गया। खासतौर पर यूएई से आयात में भारी उछाल दर्ज किया गया। वर्ष 2022 में जहां यूएई से सोने का आयात 2.9 अरब डॉलर था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 16.5 अरब डॉलर पहुंच गया।
आर्थिक विशेषज्ञों ने जताई चिंता
आर्थिक शोध संस्थानों और व्यापार विशेषज्ञों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सोने का आयात इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में देश की आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा की जानी चाहिए और सोने से जुड़े आयात नियमों को और सख्त बनाया जाना चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि सोना, चांदी और प्लेटिनम जैसी बहुमूल्य धातुओं को भविष्य के व्यापार समझौतों से बाहर रखा जाए ताकि विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन को सुरक्षित रखा जा सके।
आम लोगों पर क्या पड़ सकता है असर?
अगर सोने का आयात लगातार बढ़ता रहा और व्यापार घाटा ज्यादा बढ़ गया तो इसका असर आम लोगों पर भी दिखाई दे सकता है। रुपये की कमजोरी से पेट्रोल, डीजल और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
इसके अलावा सरकार भविष्य में सोने पर आयात शुल्क फिर बढ़ा सकती है, जिससे सोने के दाम और ऊपर जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को निवेश के लिए केवल सोने पर निर्भर रहने के बजाय दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान देना चाहिए।
क्या है आगे का रास्ता?
सरकार अब सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए नई रणनीति पर काम कर सकती है। घरेलू निवेश योजनाओं को बढ़ावा देना, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं को लोकप्रिय बनाना और आयात नियमों को सख्त करना इस दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में भारत के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा दबाव बन सकता है।

