सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने के बाद बीएसई के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जानिए कैसे कीमती धातुओं की महंगाई से शेयर बाजार को हुआ फायदा।
केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले का असर अब देश के पूंजी बाजार में भी साफ दिखाई देने लगा है। सरकार की इस घोषणा के बाद जहां घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, वहीं दूसरी ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के शेयरों में भी जोरदार तेजी देखने को मिली। बाजार खुलते ही बीएसई के शेयरों में करीब चार प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी केवल संयोग नहीं बल्कि बाजार की बढ़ती गतिविधियों और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। सरकार के फैसले के बाद कमोडिटी और डेरिवेटिव बाजारों में कारोबार तेजी से बढ़ा है, जिसका सीधा फायदा शेयर बाजार से जुड़ी कंपनियों को मिल रहा है।
सरकार ने क्यों बढ़ाया आयात शुल्क?
केंद्र सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी के आयात पर लगने वाले मूल सीमा शुल्क को बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ कृषि अवसंरचना और विकास उपकर में भी वृद्धि की गई है। इन दोनों को मिलाकर अब कुल प्रभावी आयात शुल्क लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
सरकार का मानना है कि इससे विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी, व्यापार घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और रुपये की स्थिति मजबूत हो सकेगी। लगातार बढ़ते सोने के आयात को लेकर सरकार पहले से ही चिंता जता रही थी क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है।
सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी
आयात शुल्क बढ़ने के तुरंत बाद घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। बाजार में सोना और चांदी महंगे होने लगे, जिससे निवेशकों और कारोबारियों की सक्रियता बढ़ गई। विशेषज्ञों के अनुसार जब भी कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी या उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तब बड़ी संख्या में व्यापारी और निवेशक बाजार में सक्रिय हो जाते हैं।
इसी बढ़ती गतिविधि का असर पूंजी बाजार और एक्सचेंज कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई देता है। बीएसई के शेयरों में तेजी को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
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बीएसई को कैसे मिला फायदा?
बीएसई देश के सबसे बड़े शेयर बाजार संस्थानों में शामिल है। यहां बड़ी मात्रा में शेयर, डेरिवेटिव और अन्य वित्तीय उत्पादों का कारोबार होता है। जब बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है तो निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ती है और ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेजी आती है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सचेंज कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा लेनदेन शुल्क और कारोबार की मात्रा पर निर्भर करता है। ऐसे में जब कमोडिटी और पूंजी बाजार में तेजी आती है तो बीएसई जैसी कंपनियों की कमाई बढ़ने की उम्मीद भी मजबूत होती है। यही कारण है कि निवेशकों ने बीएसई के शेयरों में तेजी से खरीदारी शुरू कर दी।
निवेशकों का भरोसा बढ़ा
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में बढ़ती अस्थिरता कई बार एक्सचेंज कंपनियों के लिए लाभदायक साबित होती है। सोने और चांदी की कीमतों में तेज बदलाव के चलते निवेशकों की रुचि कमोडिटी और शेयर बाजार दोनों में बढ़ी है। इससे बीएसई जैसे संस्थानों को कारोबार बढ़ने का फायदा मिल सकता है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर सोने की कीमतें लगातार बहुत ज्यादा बढ़ती हैं तो खुदरा मांग पर असर पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार में बढ़ी गतिविधियों ने एक्सचेंज कंपनियों के शेयरों को मजबूती दी है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा बीएसई शेयर
सरकार के फैसले के बाद बीएसई का शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। बाजार में निवेशकों की भारी खरीदारी के चलते इसके शेयरों में लगातार मजबूती बनी रही। जानकारों का कहना है that निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में बाजार में कारोबार और अधिक बढ़ सकता है, जिससे एक्सचेंज कंपनियों की आय में भी सुधार होगा।
कमोडिटी बाजार में बढ़ सकती है गतिविधि
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में यदि सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहता है तो कमोडिटी बाजार में निवेशकों की भागीदारी और बढ़ सकती है। इससे पूंजी बाजार से जुड़ी कंपनियों को लंबे समय तक फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतें आने वाले समय में भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगी। फिलहाल सरकार के फैसले ने बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है और निवेशकों की निगाहें अब कमोडिटी तथा शेयर बाजार दोनों पर टिकी हुई हैं।

