चीन ने Meta की Manus अधिग्रहण डील पर रोक लगाई, AI टेक्नोलॉजी को लेकर अमेरिका-चीन के बीच टकराव और गहराया।
वैश्विक टेक इंडस्ट्री में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां Meta को चीन की ओर से बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन सरकार ने एजेंटिक AI स्टार्टअप Manus के साथ प्रस्तावित करीब 2 अरब डॉलर के अधिग्रहण सौदे को रद्द कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर प्रतिस्पर्धा चरम पर है और अमेरिका-चीन के बीच तकनीकी वर्चस्व की जंग लगातार तेज होती जा रही है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के National Development and Reform Commission ने 27 अप्रैल को इस डील को रोकने का आदेश दिया। जांच के दौरान विदेशी निवेश और संवेदनशील तकनीक के निर्यात से जुड़े संभावित नियम उल्लंघन की आशंका जताई गई। गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में Meta ने Manus को खरीदने की घोषणा की थी और यह सौदा लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका था, लेकिन सरकारी हस्तक्षेप के कारण इसे रोक दिया गया।
Manus को AI इंडस्ट्री का उभरता सितारा माना जाता है। कंपनी की शुरुआत चीन में हुई थी, लेकिन बाद में उसने अपना मुख्यालय सिंगापुर में शिफ्ट कर लिया। 2025 में Manus ने एक एडवांस जनरल-पर्पज AI एजेंट लॉन्च किया था, जो वेब ब्राउजिंग, मार्केट रिसर्च, कोडिंग और डेटा एनालिसिस जैसे जटिल कार्य खुद कर सकता है। इस तकनीक को Meta अपने AI असिस्टेंट और एंटरप्राइज प्रोडक्ट्स में शामिल करना चाहता था, जिससे उसकी AI क्षमताओं में बड़ा इजाफा होता।
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इस फैसले के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि AI सेक्टर में अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ सकता है। चीन के कई विश्लेषकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इस तरह की डील से एडवांस AI टेक्नोलॉजी एक भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के हाथ लग सकती है। हाल ही में Manus के वरिष्ठ अधिकारियों से बीजिंग में पूछताछ भी की गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चीन इस मामले को लेकर गंभीर है।
दूसरी ओर, अमेरिका ने भी DeepSeek सहित कई चीनी कंपनियों पर बौद्धिक संपदा के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। इससे साफ है कि AI अब केवल तकनीकी विकास का क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन चुका है।
Meta के लिए यह झटका उसकी AI रणनीति को प्रभावित कर सकता है, वहीं वैश्विक स्तर पर यह संकेत देता है कि आने वाले समय में टेक कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। AI की इस दौड़ में अब हर कदम न केवल तकनीकी बल्कि राजनीतिक और आर्थिक नजरिए से भी बेहद अहम बन गया है।

