सिक्योरिटी रिसर्चर के दावे के मुताबिक गूगल क्रोम बिना यूजर परमिशन के 4GB एआई मॉडल डाउनलोड कर रहा है, जिससे प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं।
गूगल के लोकप्रिय वेब ब्राउजर क्रोम को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि यह यूजर्स की अनुमति के बिना उनके सिस्टम में एक भारी-भरकम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फाइल डाउनलोड कर रहा है। इस खुलासे के बाद टेक जगत में प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
सिक्योरिटी रिसर्चर अलेक्जेंडर हैनफ के अनुसार, क्रोम कुछ चुनिंदा डिवाइसों पर लगभग 4GB आकार का एआई मॉडल अपने आप इंस्टॉल कर रहा है। यह फाइल कथित तौर पर ब्राउजर के ऑन-डिवाइस एआई फीचर्स को सपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल होती है, जिसमें लिखने में मदद और अन्य स्मार्ट टूल्स शामिल हैं।
रिसर्चर का दावा है कि डाउनलोड शुरू करने से पहले क्रोम सिस्टम के हार्डवेयर की जांच करता है और यदि डिवाइस योग्य पाया जाता है, तो बिना किसी यूजर नोटिफिकेशन के फाइल बैकग्राउंड में डाउनलोड हो जाती है।
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एक नियंत्रित परीक्षण में यह भी सामने आया कि ब्राउजर ने ‘OptGuideOnDeviceModel’ नाम का एक फोल्डर बनाया और लगभग 14 मिनट में पूरा 4GB डेटा डाउनलोड कर लिया। इस दौरान किसी भी प्रकार की यूजर अनुमति नहीं ली गई।
हैनफ का कहना है कि यूजर्स को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती कि उनके सिस्टम में इतनी बड़ी एआई फाइल स्टोर की जा रही है, जिससे स्टोरेज उपयोग और डेटा खपत में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है।
इस मामले के सामने आने के बाद टेक विशेषज्ञों ने इसे लेकर चिंता जताई है और कहा है कि यदि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है, तो यह यूजर प्राइवेसी के लिए गंभीर मुद्दा बन सकता है। हालांकि गूगल की तरफ से अभी इस दावे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
फिलहाल यह मामला टेक कम्युनिटी में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और सभी की नजर अब गूगल की प्रतिक्रिया पर टिकी है।

