भागलपुर में DM अलंकृता पांडेय के नेतृत्व में महिला अधिकारी प्रशासन की कमान संभाल रही हैं। बाढ़, श्रावणी मेला और विकास कार्यों में निभा रहीं अहम भूमिका।
बिहार के भागलपुर जिले में प्रशासनिक व्यवस्था में महिला अधिकारियों की मजबूत भागीदारी देखने को मिल रही है। जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय के नेतृत्व में महिला अधिकारी विकास योजनाओं, राजस्व व्यवस्था, ग्रामीण विकास, सामाजिक कल्याण और आपदा प्रबंधन से लेकर बड़े आयोजनों तक अहम जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला समानता दिवस के मौके पर भागलपुर की यह प्रशासनिक तस्वीर महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण की एक प्रभावी मिसाल के रूप में सामने आई है। जिले के शीर्ष प्रशासनिक पदों से लेकर प्रखंड और अंचल स्तर तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महिला अधिकारियों के पास हैं।
DM अलंकृता पांडेय के नेतृत्व में महिला अधिकारियों की अहम भूमिका
भागलपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में महिला अधिकारियों की मौजूदगी केवल पदों तक सीमित नहीं है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, सरकारी योजनाओं की निगरानी, राजस्व मामलों के निपटारे और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने में उनकी सक्रिय भूमिका नजर आ रही है।
जिला प्रशासन की ओर से आम लोगों की समस्याओं के समाधान और योजनाओं को समय पर जमीन तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
श्रावणी मेले में दिखी प्रशासन की नई सोच
भागलपुर के सुल्तानगंज में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध श्रावणी मेला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
इस बार मेले की व्यवस्थाओं में पारंपरिक इंतजामों के साथ आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल देखने को मिला। सुल्तानगंज में लेजर शो का आयोजन आकर्षण का केंद्र रहा।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए किए गए व्यापक प्रबंधों के साथ तकनीक के इस्तेमाल ने आयोजन को नया स्वरूप दिया। इससे प्रशासन की आधुनिक कार्यशैली और आयोजन प्रबंधन की क्षमता भी सामने आई।
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भागलपुर में प्रमुख पदों पर महिला अधिकारियों की जिम्मेदारी
जिले में अलग-अलग प्रशासनिक और विभागीय पदों पर महिला अधिकारी जिम्मेदारी निभा रही हैं। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
- जिलाधिकारी: अलंकृता पांडेय
- प्रभारी पदाधिकारी, जिला लोक सूचना शाखा सह DCLR सदर: अपेक्षा मोदी
- OSD, जिला गोपनीय शाखा एवं राजस्व पदाधिकारी: अंकिता चौधरी
- वरीय उप समाहर्ता, जिला सामान्य शाखा: सोनाली
- SDC, स्थापना कोषांग सह जिला प्रमाणपत्र पदाधिकारी: सुभाषिनी प्रसाद
- अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी: डॉ. मीनाक्षी (सदर), बैजन्ती (कहलगांव) और सोनी कुमारी (नवगछिया)
- जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, ICDS: अनुपमा कुमारी
- सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई: बेबी रानी
- जिला पशुपालन पदाधिकारी: डॉ. अंजली कुमारी
- सहायक निदेशक, जिला उद्यान: मधु प्रिया
- आईटी मैनेजर: पुनम कुमारी
CO और BDO स्तर पर भी महिला नेतृत्व
अंचल और प्रखंड स्तर पर भी महिला अधिकारी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।
अंचलाधिकारी (CO):
अदिति रंजन – बिहपुर
दिव्या कुमारी – सबौर
डॉ. हर्षा कोमल – शाहकुंड
प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO):
मोनी कुमारी सोनी – खरीक
शालिनी कुमारी – नाथनगर
प्रियंका कुमारी – रंगराचौक
इन अधिकारियों की जिम्मेदारी सीधे तौर पर ग्रामीण प्रशासन, विकास योजनाओं, राजस्व और स्थानीय स्तर की समस्याओं से जुड़ी है।
बाढ़ के दौरान महिला अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
भागलपुर जैसे गंगा किनारे बसे जिले में बाढ़ और जलस्तर बढ़ना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होती है। हालिया परिस्थितियों में गंगा के जलस्तर में वृद्धि के बीच प्रशासन को कई महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़े।
विक्रमशिला सेतु पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवागमन बंद रखने की अवधि बढ़ाने का फैसला भी इसी आपदा प्रबंधन का हिस्सा रहा। प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थिति के अनुसार निर्णय लिया।
जलमग्न इलाकों में नाव से पहुंचकर लिया जायजा
बाढ़ प्रभावित दियारा क्षेत्रों में लगातार निगरानी के साथ राहत और बचाव कार्यों पर भी ध्यान दिया गया। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया।
डीएम समेत महिला अधिकारियों ने नाव के माध्यम से जलमग्न इलाकों तक पहुंचकर जमीनी स्थिति का जायजा लिया और राहत कार्यों को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि महिला नेतृत्व केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अधिकारी सीधे मैदान में उतरकर जिम्मेदारी निभा रही हैं।
विकास से लेकर आपदा प्रबंधन तक महिला नेतृत्व
भागलपुर की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में महिला अधिकारियों की भूमिका कई क्षेत्रों में दिखाई दे रही है। एक तरफ विकास और कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी की जा रही है, तो दूसरी ओर श्रावणी मेले जैसे बड़े आयोजन और बाढ़ जैसी आपदा के दौरान भी प्रशासनिक जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से संभाली जा रही हैं।
भागलपुर की यह तस्वीर बताती है कि महिला नेतृत्व अब प्रशासनिक व्यवस्था में केवल प्रतिनिधित्व का विषय नहीं रहा, बल्कि निर्णय लेने, प्रबंधन और जमीनी स्तर पर परिणाम देने का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

