अमित शाह ने घुसपैठ मुक्त भारत का लक्ष्य बताया। 850 से अधिक अफसरों को सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और ड्रग्स के खिलाफ सख्त रणनीति के निर्देश दिए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और भारत को अवैध घुसपैठ से मुक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया है। मंगलवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की ओर से आयोजित नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी कॉन्फ्रेंस (NSSC) के समापन सत्र में उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश को बहुत कम समय में घुसपैठ से मुक्त करना है।
कॉन्फ्रेंस में सीमावर्ती राज्यों, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs), पुलिस और खुफिया एजेंसियों के 850 से अधिक अधिकारी शामिल हुए। शाह ने कहा कि पिछले आठ महीनों के दौरान केंद्र सरकार ने सभी जमीनी सीमा वाले राज्यों का दौरा किया और सीमा सुरक्षा को लेकर एक व्यापक रणनीति साझा की है।
सीमा सुरक्षा के लिए बनाया गया व्यापक मॉडल
अमित शाह के मुताबिक, प्रभावी सीमा सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए सीमा सुरक्षा बल, राज्य और जिला प्रशासन, केंद्र सरकार के संबंधित विभाग और स्थानीय नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस साझा व्यवस्था के जरिए ऐसा मजबूत तंत्र तैयार किया जाए, जिससे अवैध घुसपैठ की पहचान समय रहते हो सके और उसे रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा सके।
Addressed the concluding session of the 9th two-day National Security Strategies Conference 2026, in New Delhi today.
This conference has evolved into a robust forum for developing strategies and anticipating emerging challenges to national security. Under the leadership of Modi… pic.twitter.com/yodCLXCEzb
— Amit Shah (@AmitShah) August 25, 2026
‘यह देश कोई धर्मशाला नहीं’
NSSC को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि भारत में रहने का अधिकार देश के नागरिकों को है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “यह देश कोई धर्मशाला नहीं है” और सरकार देश को अवैध घुसपैठ से मुक्त करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
शाह ने कहा कि अवैध घुसपैठ से देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा इससे कुछ क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय स्थिति में भी असामान्य बदलाव की आशंका रहती है।
जम्मू-कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद और पूर्वोत्तर का जिक्र
गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र और पूर्वोत्तर देश की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। उनके अनुसार, केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से इन मोर्चों पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा चुनौतियों के गंभीर संकट बनने से पहले ही उनकी पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करना जरूरी है। यदि पिछली सरकारों ने इन समस्याओं का समय रहते आकलन किया होता, तो देश को लंबे समय तक इनका सामना नहीं करना पड़ता।
also read: मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज, इन मंत्रियों के विभाग बदलने की…
PFI कार्रवाई को बताया केंद्र-राज्य समन्वय का उदाहरण
अमित शाह ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ हुई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने सितंबर 2022 में विभिन्न राज्यों में हुई कार्रवाई को केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बताया।
गृह मंत्री ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अधिकारियों को पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डेटा इंटीग्रेशन, डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल करना होगा। इससे समय रहते महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर संभावित खतरों को रोकने में मदद मिल सकती है।
2047 के विकसित भारत के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा जरूरी
अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत आंतरिक सुरक्षा इस लक्ष्य की बुनियादी जरूरत है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि भारत को विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनना है, तो देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करना होगा। उनके मुताबिक, आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए सुरक्षित माहौल बेहद जरूरी है।
‘प्रहार’ सिद्धांत को जमीन पर उतारने पर जोर
गृह मंत्री ने देश की आतंकवाद विरोधी रणनीति ‘प्रहार’ (PRAHAAR) को प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से मुकाबला केवल किसी एक संगठन या घटना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
उनका जोर ऐसी रणनीति विकसित करने पर रहा, जिसमें आतंकवादी गतिविधियों और उनसे जुड़े नेटवर्क की पहचान पहले हो और खतरे को बड़ा रूप लेने से पहले ही कार्रवाई की जाए।
नशे के खिलाफ ‘3D’ रणनीति
अमित शाह ने देश को नशीले पदार्थों से मुक्त बनाने के अभियान में राज्यों की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने राज्य पुलिस से ‘Detect, Disrupt और Destroy’ यानी नशीले पदार्थों के नेटवर्क को पहचानने, उसकी गतिविधियों को बाधित करने और उसे खत्म करने की रणनीति पर काम करने का आह्वान किया।
गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और ड्रग्स के खिलाफ अभियान को अलग-अलग देखने के बजाय एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के तहत आगे बढ़ाने की जरूरत है।
भविष्य की चुनौतियों पर पहले से तैयारी
NSSC का उद्देश्य आने वाले 15 से 20 वर्षों में सामने आने वाली सुरक्षा चुनौतियों और रुझानों का आकलन करना तथा उनसे निपटने की रणनीति तैयार करना है। अमित शाह ने अधिकारियों से भविष्य की चुनौतियों का अनुमान लगाकर पहले से तैयारी करने को कहा।
उन्होंने जोर दिया कि डेटा, तकनीक, AI और केंद्र-राज्य समन्वय के बेहतर इस्तेमाल से भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। सरकार का व्यापक लक्ष्य एक सुरक्षित, घुसपैठ मुक्त और नशा मुक्त भारत तैयार करना है।

