भड़ली नवमी 2026: भड़ली नवमी 22 जुलाई को मनाई जाएगी। जानें इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त और चातुर्मास से पहले किए जाने वाले मांगलिक कार्य।
भड़ली नवमी 2026: हिंदू धर्म में कुछ तिथियों को विशेष महत्व दिया गया है, जिनमें बिना शुभ मुहूर्त देखे भी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इन्हीं खास तिथियों में शामिल है भड़ली नवमी। साल 2026 में भड़ली नवमी 22 जुलाई 2026 को पड़ रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी कहा जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और अन्य शुभ कार्य करना फलदायी माना जाता है।
भड़ली नवमी 2026 की तारीख और शुभ समय
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत:
22 जुलाई 2026 को सुबह 5:16 बजे से होगी।
23 जुलाई 2026 को सुबह 7:03 बजे तक रहेगी।
इसी अवधि में भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व माना जाएगा।
क्यों खास मानी जाती है भड़ली नवमी?
भड़ली नवमी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन शुभ कार्य करने के लिए विशेष ज्योतिषीय गणना की आवश्यकता नहीं होती।
चातुर्मास शुरू होने से पहले यह आखिरी महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है, क्योंकि इसके बाद कई महीनों तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों को विवाह के लिए शुभ तिथि नहीं मिल पाती, वे भड़ली नवमी के दिन विवाह जैसे कार्य कर सकते हैं।
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भड़ली नवमी पर कौन-कौन से शुभ कार्य किए जा सकते हैं?
भड़ली नवमी के दिन कई प्रकार के शुभ कार्य करने की परंपरा है, जैसे:
विवाह और सगाई
इस दिन विवाह, रिश्ता तय करने और सगाई जैसे शुभ कार्यों को शुभ माना जाता है।
गृह प्रवेश
नए घर में प्रवेश या नए भवन से जुड़े धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।
नया व्यापार शुरू करना
दुकान, कार्यालय, व्यवसाय या किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए यह दिन शुभ माना जाता है।
वाहन और संपत्ति खरीदना
इस दिन वाहन, जमीन या अन्य कीमती वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ फलदायी माना जाता है।
पूजा-पाठ और दान
भक्त इस दिन पूजा, हवन, व्रत और जरूरतमंद लोगों को दान कर सकते हैं।
भड़ली नवमी पर देवी-देवताओं की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भड़ली नवमी के दिन देवी पार्वती की आराधना करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
वहीं भगवान विष्णु के भक्त इस दिन पूजा, हवन और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
भड़ली नवमी के बाद शुरू होगा चातुर्मास
भड़ली नवमी के कुछ दिनों बाद 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास का प्रारंभ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं।
इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। यही कारण है कि भड़ली नवमी को चातुर्मास से पहले शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है।
धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है भड़ली नवमी
भड़ली नवमी केवल एक तिथि नहीं बल्कि धार्मिक आस्था और शुभ शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। चातुर्मास से पहले आने वाली इस तिथि पर लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने का प्रयास करते हैं।

