8 साल से कनाडा में रह रहे भारतीय ट्रक ड्राइवर हरीश कुमार और परिवार को शरण याचिका खारिज होने के बाद भारत लौटना पड़ा।
कनाडा के क्यूबेक में करीब आठ वर्षों से रह रहा एक भारतीय परिवार अब भारत लौट आया है। परिवार के शरणार्थी दावे और मानवीय आधार पर कनाडा में रहने की अपील स्वीकार नहीं होने के बाद अधिकारियों ने उन्हें देश छोड़ने का आदेश दिया। इसके बाद हरीश कुमार, उनकी पत्नी सोनिका और उनके दो बच्चों जापेश और गौलाश को कनाडा से भारत वापस लौटना पड़ा।
परिवार के अनुसार, हरीश कुमार अप्रैल 2018 में पत्नी और बच्चों के साथ कनाडा पहुंचे थे। उन्होंने भारत में अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा होने का दावा करते हुए कनाडा में शरण के लिए आवेदन किया था। मामले में कई वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलने के बाद आखिरकार परिवार को कनाडा छोड़ना पड़ा।
7 सितंबर को भारत के लिए रवाना हुआ परिवार
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार को 4 अगस्त को जानकारी दी गई कि उनका रिफ्यूजी क्लेम स्वीकार नहीं किया गया है। उन्हें 7 सितंबर तक कनाडा छोड़ने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद परिवार 7 सितंबर को कनाडा से भारत के लिए रवाना हो गया।
हरीश कुमार का कहना है कि भारत छोड़ने के पीछे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता थी। हालांकि, कनाडा में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उनकी शरण की अपील सफल नहीं हो सकी।
पत्नी को CBSA ने हिरासत में लिया
हरीश कुमार ने बताया कि भारत लौटने से कुछ समय पहले उनकी पत्नी को कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) ने हिरासत में लिया था। परिवार के निर्वासन को लेकर अप्रवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले Immigrant Workers Centre ने भी आपत्ति जताई।
संगठन की ओर से कहा गया कि हरीश ने कनाडा में ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम किया और कोविड-19 महामारी के दौरान जरूरी सामान की सप्लाई जारी रखने वाले कर्मचारियों में शामिल रहे। संगठन ने उनके कनाडा में काम, टैक्स भुगतान और समुदाय में योगदान का हवाला देते हुए निर्वासन पर सवाल उठाए।
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बच्चों पर पड़ेगा असर?
परिवार के मामले में बच्चों का मुद्दा भी चर्चा में रहा। दोनों बच्चे कई वर्षों तक क्यूबेक में स्कूल गए और वहीं बड़े हुए। परिवार से जुड़े समर्थकों का कहना है कि लंबे समय तक कनाडा में रहने के बाद अचानक भारत लौटने से बच्चों को सामाजिक और शैक्षणिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
Immigrant Workers Centre ने भी बच्चों की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की और परिवार को हटाए जाने के फैसले की आलोचना की।
कनाडाई कानून के तहत क्यों हुआ निर्वासन?
कनाडा के इमिग्रेशन अधिकारियों के मुताबिक, Immigration and Refugee Protection Act की धारा 48 के तहत जब किसी व्यक्ति के खिलाफ हटाने का आदेश प्रभावी हो जाता है, तो CBSA को उसे जल्द से जल्द कनाडा से बाहर करना होता है।
हरीश कुमार के परिवार का मामला करीब आठ वर्षों तक विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरा। शरणार्थी दावे और मानवीय आधार पर कनाडा में रहने की कोशिश असफल होने के बाद परिवार को भारत लौटना पड़ा।
भारत में खतरे का क्या था दावा?
परिवार से जुड़ी Change.org याचिका में दावा किया गया था कि हरीश कुमार पंजाब के गोराया में एक छोटी किराना दुकान चलाते थे। याचिका के मुताबिक, उनसे चुनाव प्रचार के लिए कथित तौर पर पैसे मांगे गए थे और उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली थीं।
हालांकि, ये परिवार और उसके समर्थकों द्वारा किए गए दावे हैं। कनाडा में उनके शरण आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया और अंततः परिवार को निर्वासन का सामना करना पड़ा।
आठ साल कनाडा में बिताने के बाद परिवार के भारत लौटने का मामला कनाडा की शरण और इमिग्रेशन नीतियों को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। परिवार के समर्थक जहां मानवीय आधार पर फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कनाडाई अधिकारियों की कार्रवाई मौजूदा इमिग्रेशन कानून और लागू हटाने के आदेश के तहत हुई है।

