दिल्ली में क्या हर पांचवीं मंजिल अवैध है? जानें सत्य निकेतन हादसे के बाद भवन निर्माण पर सरकार की सख्ती और मकान बनाने के जरूरी नियम।
दिल्ली में भवन निर्माण नियम: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बिना मंजूरी बनाई गई पांचवीं मंजिल वाली इमारतों को सील करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद लोगों के बीच सवाल उठने लगा है कि क्या दिल्ली में हर पांचवीं मंजिल गैरकानूनी मानी जाएगी?
दरअसल, ऐसा बिल्कुल नहीं है। किसी इमारत की पांचवीं मंजिल केवल इसलिए अवैध नहीं हो जाती क्योंकि वह पांचवीं मंजिल है। भवन की वैधता कई नियमों पर निर्भर करती है, जिनमें स्वीकृत भवन नक्शा, इमारत की कुल ऊंचाई, भू-उपयोग, फर्श क्षेत्र अनुपात, खुली जगह, पार्किंग और अग्नि सुरक्षा जैसे मानक शामिल हैं।
क्या दिल्ली में पांचवीं मंजिल बनाना अवैध है?
दिल्ली में हर पांचवीं मंजिल को अवैध नहीं माना जाता। यदि किसी भवन का निर्माण संबंधित विभाग से स्वीकृत नक्शे और निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ है, तो केवल पांचवीं मंजिल होने के कारण उसे गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता।
मुख्य सवाल यह है कि इमारत का वास्तविक निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है या नहीं। यदि किसी भवन में बिना अनुमति अतिरिक्त मंजिल बनाई गई है या स्वीकृत योजना से अधिक निर्माण किया गया है, तो संबंधित निर्माण को अनधिकृत माना जा सकता है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद क्यों बढ़ी सख्ती?
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। हादसे में कई लोगों की जान गई थी।
इसके बाद स्थानीय निकायों को ऐसे भवनों की पहचान करने पर जोर दिया गया है, जिनका निर्माण स्वीकृत योजना के विपरीत हुआ है या जो सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकते हैं।
नगर निगम के अधिकारियों को निर्माण की जांच करते समय स्वीकृत भवन नक्शे, एकीकृत भवन उपनियम 2016 और दिल्ली के मास्टर प्लान में दिए गए नियमों को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली में घर बनाने के लिए किन नियमों का पालन जरूरी है?
दिल्ली में मकान या अन्य इमारत बनाने के लिए कई नियमों का पालन करना आवश्यक है। इनमें भवन की ऊंचाई, निर्माण क्षेत्र, खुली जगह, पार्किंग और सुरक्षा से जुड़े प्रावधान प्रमुख हैं।
1. स्वीकृत भवन नक्शा
किसी भी मकान के लिए स्वीकृत भवन नक्शा बेहद महत्वपूर्ण होता है। वास्तविक निर्माण इसी नक्शे के अनुसार होना चाहिए। यदि नक्शे में चार मंजिल की अनुमति है और बाद में बिना अनुमति पांचवीं मंजिल बना दी जाती है, तो यह नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
2. फर्श क्षेत्र अनुपात
फर्श क्षेत्र अनुपात यानी एफएआर यह निर्धारित करता है कि किसी भूखंड के आकार के हिसाब से कुल कितना निर्माण किया जा सकता है।
सिर्फ जमीन उपलब्ध होने के आधार पर अतिरिक्त मंजिल या कमरा नहीं बनाया जा सकता। निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण करने पर कार्रवाई हो सकती है।
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3. इमारत की कुल ऊंचाई
भवन की वैधता तय करने में मंजिलों की संख्या के साथ-साथ उसकी कुल ऊंचाई भी महत्वपूर्ण होती है। इमारत की ऊंचाई बढ़ने पर अग्नि सुरक्षा और अन्य सुरक्षा मानकों से जुड़े नियम भी लागू हो सकते हैं। इसलिए केवल मंजिलों की संख्या देखकर भवन की वैधता तय नहीं की जा सकती।
4. खुली जगह और पीछे हटने की दूरी
भवन के आसपास कितनी जगह खुली रखनी है और भूखंड के कितने हिस्से में निर्माण किया जा सकता है, यह भी नियमों के तहत तय होता है। खुली जगह हवा, रोशनी, आवागमन और आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा के लिए जरूरी होती है।
5. पार्किंग की व्यवस्था
मकान खरीदने से पहले पार्किंग की स्थिति भी जांचनी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि पार्किंग स्वीकृत भवन योजना में शामिल है या नहीं और उसका इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
6. अग्नि सुरक्षा नियम
बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। भवन की ऊंचाई और उसके इस्तेमाल के आधार पर अतिरिक्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और मंजूरी की जरूरत हो सकती है। इसलिए घर खरीदने से पहले यह जांचना जरूरी है कि भवन पर लागू अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया है या नहीं।
अवैध मंजिल मिलने पर क्या हो सकता है?
यदि किसी इमारत में बिना अनुमति अतिरिक्त निर्माण पाया जाता है, तो संबंधित विभाग नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है। इसमें निर्माण को सील करना, अनधिकृत हिस्से को हटाने का आदेश देना या अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
अवैध निर्माण वाली संपत्ति खरीदने पर मालिक को आगे चलकर कानूनी विवाद, सीलिंग, संपत्ति बेचने में परेशानी और बैंक से ऋण लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
घर खरीदने से पहले इन चीजों की करें जांच
दिल्ली में संपत्ति खरीदते समय सिर्फ कीमत और स्थान देखना पर्याप्त नहीं है। खरीदार को इन बातों की भी जांच करनी चाहिए:
- स्वीकृत भवन नक्शा उपलब्ध है या नहीं।
- वास्तविक निर्माण नक्शे के मुताबिक है या नहीं।
- मंजिलों की संख्या स्वीकृत सीमा में है या नहीं।
- निर्धारित एफएआर का पालन हुआ है या नहीं।
- पार्किंग स्वीकृत योजना के अनुसार है या नहीं।
- छत या अन्य हिस्सों में अतिरिक्त निर्माण तो नहीं हुआ है।
- संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज सही हैं या नहीं।
- जहां आवश्यक हो, वहां अग्नि सुरक्षा संबंधी मंजूरी और व्यवस्था मौजूद है या नहीं।
अगर पहले से अतिरिक्त मंजिल बनी है तो क्या करें?
यदि आपके मकान में ऐसी अतिरिक्त मंजिल या निर्माण मौजूद है, जो स्वीकृत नक्शे में शामिल नहीं है, तो सबसे पहले पुराने दस्तावेज और स्वीकृत भवन योजना की जांच करें।
इसके बाद किसी योग्य वास्तु विशेषज्ञ से वास्तविक निर्माण और स्वीकृत योजना का मिलान करवाना बेहतर होगा। यदि सरकारी कार्रवाई या कानूनी विवाद की स्थिति है, तो संपत्ति कानून के विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।

