राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव 2026 के पहले चरण में 168 निकायों के 5,393 वार्डों में मतदान शुरू। 57 लाख से ज्यादा मतदाता, युवा वोटर्स और स्थानीय मुद्दे बने चुनाव के केंद्र में।
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 के पहले चरण के लिए मतदान शुरू हो गया है। प्रदेश के 39 जिलों में मतदाता अपने-अपने वार्ड से पार्षद चुनने के लिए वोट डाल रहे हैं। पहले चरण में चार नगर निगम सहित कुल 168 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में मतदान कराया जा रहा है।
मतदान प्रक्रिया सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी। चुनाव प्रचार सोमवार शाम समाप्त होने के बाद अब राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की नजर अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर है।
57 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे मतदान
पहले चरण के चुनाव में कुल 57,52,278 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनके लिए 7,683 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस चरण में 20,623 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
पहले चरण में पाली, भरतपुर, भीलवाड़ा और अलवर नगर निगम भी शामिल हैं। वहीं जयपुर नगर निगम सहित छह नगर निगमों में दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को प्रस्तावित है। दोनों चरणों के चुनाव की मतगणना 14 सितंबर को होगी।
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प्रदेश में 1.44 करोड़ से अधिक मतदाता
पूरे राजस्थान की बात करें तो 309 नगरीय निकायों में कुल 1,44,03,853 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें करीब 73.98 लाख पुरुष, 70.04 लाख महिला और 511 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2019 के निकाय चुनाव की तुलना में इस बार मतदाताओं की संख्या में 27.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
युवा वोटर्स पर राजनीतिक दलों की नजर
इस बार नगरीय चुनाव में युवा मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 35 वर्ष तक की उम्र वाले वोटर्स की संख्या 40 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए युवा वोट बैंक को साधना अहम हो गया है।
उम्मीदवारों में भी युवाओं की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है। 40 वर्ष तक की उम्र वाले प्रत्याशियों की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत से अधिक है। इससे साफ है कि इस चुनाव में युवा मतदाता और युवा उम्मीदवार दोनों ही अहम फैक्टर बन सकते हैं।
सड़क, पानी और सफाई जैसे मुद्दे अहम
नगरीय निकाय चुनावों में मतदाताओं के फैसले पर स्थानीय समस्याओं का सीधा असर पड़ता है। कई वार्डों में सड़क, सफाई, पेयजल, सीवर व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पार्क, यातायात और अतिक्रमण जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं।
मतदाताओं के लिए उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और उसके पिछले काम भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जनता से जुड़े मुद्दे चुनावी नतीजों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
BJP-कांग्रेस ने संभाला बूथ मैनेजमेंट
प्रचार अभियान खत्म होने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति को बूथ स्तर पर केंद्रित कर दिया है। भाजपा की ओर से कमजोर बूथों की पहचान कर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है। पार्टी का मुख्य फोकस समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने पर है।
वहीं बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर भी राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हैं। कांग्रेस भी ऐसे निर्दलीय उम्मीदवारों पर नजर रख रही है, जो चुनावी मुकाबले में जीत न पाए तो भी किसी खास वार्ड में वोटों के समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।
14 सितंबर को आएगा जनता के फैसले का नतीजा
पहले चरण का मतदान शुरू होने के साथ ही प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में दर्ज होने लगेगी। अब चुनावी मुकाबले में युवा वोटर्स, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की छवि, पार्टी संगठन और बूथ मैनेजमेंट जैसे फैक्टर महत्वपूर्ण रहेंगे।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि मतदाता स्थानीय विकास और समस्याओं को प्राथमिकता देते हैं या पार्टी आधारित राजनीतिक समीकरणों को। चुनावी तस्वीर पूरी तरह 14 सितंबर की मतगणना के बाद साफ होगी।

