GBU छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद जारी 5 लाख के मुचलके का नोटिस नोएडा पुलिस ने वापस लिया। जानें पूरा मामला और पुलिस का बयान।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के बाद गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी किए गए 5 लाख रुपये के निजी मुचलके वाले नोटिस को नोएडा पुलिस ने वापस ले लिया है। नोटिस सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मामला तेजी से चर्चा में आया था।
पुलिस के मुताबिक, मामले की जानकारी अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद 4 सितंबर को जारी नोटिस उसी दिन निरस्त कर दिया गया था। पुलिस का कहना है कि छात्र को भी इस फैसले की जानकारी दे दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला ईकोटेक-1 थाना क्षेत्र से जुड़े एक प्रकरण का है। इसमें अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ शांति भंग की आशंका को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी।
कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय, ग्रेटर नोएडा कमिश्नरेट की अदालत में एसीपी कोर्ट के माध्यम से 4 सितंबर को BNSS की धारा 126/135 के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके बाद धारा 130 BNSS के तहत छात्र को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में छात्र से शांति व्यवस्था बनाए रखने को लेकर जवाब मांगा गया था।
5 लाख रुपये के निजी मुचलके का था प्रावधान
जारी किए गए नोटिस में अक्षत त्रिपाठी को 5 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने और इतनी ही राशि के दो स्थानीय सक्षम व्यक्तियों की जमानत देने को कहा गया था। उसे छह महीने की अवधि तक शांति बनाए रखने के संबंध में कारण बताने के लिए कहा गया था। मामले में सुनवाई की तारीख 5 सितंबर निर्धारित की गई थी।
नोटिस की यह राशि सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और छात्र संगठनों की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई।
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पुलिस रिपोर्ट में छात्र पर क्या आरोप लगाए गए?
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, अक्षत त्रिपाठी मूल रूप से प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र का रहने वाला है और वर्तमान में ईकोटेक-1 इलाके में रहकर गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहा है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि छात्र एक राजनीतिक दल के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को प्रेरित कर रहा था। इसके अलावा उस पर सरकार के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक बातें फैलाने का भी आरोप लगाया गया।
यह रिपोर्ट ईकोटेक-1 थाने में तैनात उपनिरीक्षक शिवा पांडेय की ओर से तैयार की गई थी, जिसे थाना प्रभारी ने आगे भेजा था।
पुलिस ने तनाव की आशंका जताई थी
पुलिस की रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि छात्र की कथित गतिविधियों के कारण विश्वविद्यालय परिसर में तनाव पैदा हो सकता है और इससे विवाद या झगड़े की स्थिति बन सकती है।
इसी रिपोर्ट के आधार पर मजिस्ट्रेट की ओर से शांति भंग की आशंका को देखते हुए कार्रवाई शुरू की गई थी। हालांकि, छात्र अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
अक्षत त्रिपाठी ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में अक्षत ने दावा किया कि वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुआ था। उसका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान वह विश्वविद्यालय की कक्षा में मौजूद नहीं था, क्योंकि उसके अनुसार संस्थान लगभग तीन महीने से बंद था।
अक्षत ने यह भी दावा किया कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हुआ था।
नोटिस वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद
अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस की कॉपी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। छात्र संगठनों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा।
विवाद बढ़ने के बाद नोएडा पुलिस ने स्पष्ट किया कि नोटिस को पहले ही 4 सितंबर को निरस्त किया जा चुका था और छात्र को इसकी जानकारी भी दे दी गई थी।
पुलिस के यू-टर्न से मामला फिर चर्चा में
5 लाख रुपये के निजी मुचलके वाले नोटिस के सार्वजनिक होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस के उसे वापस लेने के फैसले के कारण फिर चर्चा में है। एक ओर पुलिस का कहना है कि नोटिस सामने आने के बाद उसी दिन उसे निरस्त कर दिया गया था, वहीं दूसरी ओर छात्र संगठनों ने शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल, मामले में पुलिस की कार्रवाई और छात्र के दावों को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। नोटिस वापस लिए जाने के बाद आगे की कानूनी स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।

