यूपी नकली दवा नेटवर्क का खुलासा, सहारनपुर के मकान से नकली दवाओं की पैकिंग मशीनें, फॉयल, कार्टन और भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद।
उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई में लखनऊ से सहारनपुर तक फैले कथित नेटवर्क की अहम कड़ी सामने आई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच के दौरान सहारनपुर के नागल क्षेत्र में एक मकान के तहखाने से दवाओं की पैकिंग से जुड़ी मशीनें, प्रिंटेड फॉयल, कार्टन और बड़ी मात्रा में अन्य सामग्री बरामद की गई है।
यह कार्रवाई लखनऊ में गिरफ्तार किए गए सहारनपुर निवासी एजाज से पूछताछ के बाद की गई। जांच टीम उसके बताए ठिकाने तक पहुंची, जहां से दवाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुएं मिलीं। अधिकारियों ने बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे हैं।
मकान के तहखाने से मिली पैकिंग मशीनें
जांच टीम नागल क्षेत्र के ग्राम कोटा स्थित एक मकान पहुंची। यहां तहखाने की तलाशी के दौरान दवाओं की स्ट्रिप तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो और डाई-पंच बरामद किए गए।
इसके अलावा प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल और विभिन्न प्रकार की पैकिंग सामग्री भी मिली। अधिकारियों के मुताबिक, मौके से दवाओं के नाम और पैकेजिंग से संबंधित बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद हुई है। तलाशी के दौरान 41 लुपिन और दो मैक्लिओड्स के कारुगेटेड बॉक्स भी मिले।
हजारों प्रिंटेड कार्टन और दवा की स्ट्रिप बरामद
कार्रवाई के दौरान डिफकार्ट-6 नाम की दवा से संबंधित करीब 32.555 किलोग्राम स्ट्रिप्स बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही 973 प्रिंटेड कार्टन और रोसुवास एफ-10 के 472 प्रिंटेड कार्टन भी मिले।
तहखाने से लगभग 6.950 किलोग्राम पीली और 4.900 किलोग्राम सफेद गोलियां भी बरामद की गईं। इसके अलावा करीब 6.370 किलोग्राम सादी एल्युमिनियम फॉयल भी टीम के हाथ लगी। अधिकारियों ने चार अलग-अलग दवाओं के नमूने लिए हैं, जिन्हें गुणवत्ता और प्रामाणिकता की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
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FIR में कई लोगों के नाम
सहारनपुर में दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले में विनीत कुमार, प्रतीश कुमार, प्रेम मलिक, इश्तकार, रहमान, अमित सेन, एजाज और उबैर के नाम सामने आए हैं।
जांच के दौरान पूछताछ में विनीत कुमार ने कथित तौर पर बताया कि इश्तकार, रहमान और अमित सेन टैबलेट, प्रिंटेड और सादी फॉयल, कार्टन तथा बैच स्टीरियो उपलब्ध कराते थे।
बताया गया है कि दवाओं की पैकिंग के बाद तैयार स्ट्रिप्स को इश्तकार, रहमान, अमित सेन, एजाज और उबैर ले जाते थे। हालांकि, मामले में सामने आए सभी आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
रुड़की की कंपनियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
पूछताछ के दौरान विनीत कुमार ने रुड़की स्थित प्रिजार्क हेल्थकेयर और रेडिएंट प्रिंटो पैक में काम करने की जानकारी दी है। जांच एजेंसियां वी-ब्रोस लाइफसाइंसेज समेत अन्य व्यक्तियों, कंपनियों और संभावित ठिकानों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि बरामद सामग्री कहां से लाई जाती थी और कथित तौर पर तैयार की गई दवाओं की सप्लाई किन स्थानों पर होती थी।
लखनऊ में भी दवाओं की खरीद-बिक्री में गड़बड़ी
नकली दवा नेटवर्क की जांच के दौरान लखनऊ के अमीनाबाद क्षेत्र में भी दवाओं की खरीद और बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में अहमदाबाद की क्योरपाथ इंटरनेशनल के साथ श्रीकृष्ण फार्मास्युटिकल्स डिस्ट्रीब्यूटर्स और विनोद फार्मास्युटिकल्स डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला गया।
इस दौरान लेवेरा-500 दवा के दो बैच के नमूने राजकीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट में इन नमूनों को ‘प्रकृति से असली नहीं’ पाए जाने की बात सामने आई है।
खरीद और स्टॉक के रिकॉर्ड में भी अंतर
लखनऊ में दस्तावेजों की जांच के दौरान दवाओं की खरीद और बिक्री के आंकड़ों में भी अंतर सामने आया। अभिलेखों में जहां 76,790 स्ट्रिप्स की खरीद दर्ज थी, वहीं बिक्री और स्टॉक मिलाकर 85,832 स्ट्रिप्स का रिकॉर्ड पाया गया। इस अंतर को लेकर भी जांच की जा रही है। एफएसडीए ने मौके से मिली संदिग्ध दवाओं और संबंधित सामग्री को सील कर दिया है।
एफएसडीए ने दर्ज कराई FIR, जांच जारी
बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर सील करने के बाद संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि कथित नकली दवा नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों या फर्मों की भूमिका रही है।
लखनऊ से शुरू हुई जांच का सहारनपुर तक पहुंचना इस मामले को और गंभीर बनाता है। वहीं, रुड़की और हरिद्वार से जुड़े संभावित संपर्कों की जांच से नेटवर्क की आगे की कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।

