नेपाल की भीषण बाढ़ के बीच भारत में भी खतरा बढ़ा। पश्चिम बंगाल में ऑरेंज अलर्ट और बिहार में तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी, जानें कहां है ज्यादा खतरा।
नेपाल में भारी बारिश के बाद आई विनाशकारी बाढ़ से तबाही का मंजर है। इस प्राकृतिक आपदा में 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच भारत के कुछ हिस्सों में भी लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
पश्चिम बंगाल और बिहार में प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए निगरानी और तैयारियां तेज कर दी हैं। दामोदर नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते पश्चिम बंगाल में बाढ़ को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी करने की सलाह दी गई है।
पश्चिम बंगाल में बाढ़ का खतरा, बढ़ाई गई जल निकासी
दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (DVRRC) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के सिंचाई विभाग को बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी करने को कहा।
समिति के अनुसार, दामोदर नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते मैथन और पंचेत जलाशयों में तेजी से पानी पहुंच रहा है। स्थिति को देखते हुए इन जलाशयों से पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
DVRRC के सदस्य सचिव संजीव कुमार के मुताबिक, सहायक नदियों में पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो गुरुवार सुबह तक जलाशयों से पानी की निकासी और बढ़ाई जा सकती है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा बाढ़ का खतरा
दामोदर नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पश्चिम बंगाल के कई निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। पूर्व बर्दवान, हुगली और हावड़ा में गुरुवार को स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है।
दुर्गापुर स्थित दामोदर बैराज से पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ाकर 1,11,600 क्यूसेक कर दी गई है। बैराज में जलस्तर 210.80 फुट तक पहुंच चुका है, जबकि इसका अधिकतम निर्धारित स्तर 211.50 फुट है। दक्षिण बंगाल की प्रमुख नदी घाटियों में रातभर हुई तेज बारिश के बाद जलाशयों और बैराज से पानी की निकासी बढ़ाई गई है।
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बिहार में भी प्रशासन अलर्ट
पड़ोसी राज्यों में भारी बारिश और कुछ प्रमुख जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद बिहार की राजधानी पटना में भी बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने अधिकारियों को संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने कमजोर तटबंधों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाने और आपात स्थिति के लिए जरूरी संसाधन तैयार रखने को कहा है।
तटबंधों के पास रेत की बोरियां, नायलॉन क्रेट, ट्रैक्टर और जनरेटर जैसे जरूरी सामान उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संवेदनशील इलाकों में कर्मचारियों की चौबीसों घंटे तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है।
राहत शिविरों में जरूरी सुविधाओं की तैयारी
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। प्रशासन ने शिविरों में पीने का पानी, शौचालय, रोशनी, भोजन और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
जरूरत पड़ने पर सामुदायिक रसोई और मेडिकल कैंप भी शुरू किए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सामान्य दवाओं के साथ-साथ सांप और कुत्ते के काटने की दवाएं पर्याप्त मात्रा में रखने को कहा गया है।
आपात स्थिति में अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और सूचनाओं के तत्काल आदान-प्रदान के लिए जिला स्तर पर 24 घंटे संचालित नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय कर दिया गया है।
नेपाल में बाढ़ से 1,200 से ज्यादा मौतें
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अचानक आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,204 हो गई है।
आपदा के करीब एक सप्ताह बाद भी बचाव दल प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, देश के आठ प्रभावित जिलों से लगातार शव बरामद किए जाने के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़ा है।
वहीं, बाढ़ के बाद 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन का उठाया मुद्दा
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने इस प्राकृतिक आपदा के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाने की बात कही है।
बाढ़ में लापता हुए लोगों के परिवारों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों के जीवित मिलने की उम्मीद के बीच प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अपनाई है।
भारत में फिलहाल क्या स्थिति?
नेपाल की भयावह स्थिति के बीच पश्चिम बंगाल और बिहार में बढ़ते जलस्तर और लगातार बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल में दामोदर नदी और उससे जुड़े जलाशयों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि पटना में तटबंधों और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
हालांकि, इन तैयारियों का उद्देश्य संभावित बाढ़ के खतरे से पहले प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना है। लोगों को स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देने और नदी, तटबंध या जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा सकती है।

