कुरुक्षेत्र में किसानों ने धान खरीद की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। 15 सितंबर से खरीद शुरू न होने पर GT Road पर जीरी डालने की चेतावनी दी।
हरियाणा में धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू कराने समेत कई मांगों को लेकर किसान संगठनों ने बुधवार को कुरुक्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह समेत कई किसान संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लघु सचिवालय पहुंचे। किसानों ने रोष मार्च निकालते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बाद में उपायुक्त को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
किसान संगठनों ने प्रदेश में धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से शुरू करने की मांग रखी। किसान नेताओं ने कहा कि यदि तय तारीख से धान की खरीद शुरू नहीं हुई तो किसान अपनी जीरी GT रोड पर डालकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के अलग-अलग जिलों में उपायुक्त कार्यालयों के बाहर भी धान डालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है।
10 सितंबर को पिहोवा में किसान महापंचायत
भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के प्रधान संजू नंबरदार ने बताया कि किसानों के विभिन्न संगठनों ने 10 सितंबर को पिहोवा अनाज मंडी में महापंचायत आयोजित करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अगर महापंचायत से पहले सरकार किसानों की मांगों को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो बैठक में आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
किसान नेताओं का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के साथ मंडियों में आवक बढ़ने लगेगी। ऐसे में खरीद प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं होने से किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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धान खरीद में नमी की सीमा 20 फीसदी करने की मांग
किसान संगठनों ने धान की खरीद के लिए निर्धारित नमी की सीमा बढ़ाने की मांग भी उठाई है। संजू नंबरदार के मुताबिक, फिलहाल 17 प्रतिशत तक नमी वाली धान की खरीद की जाती है। किसानों का कहना है कि मौजूदा मौसम और फसल की परिस्थितियों को देखते हुए नमी की स्वीकार्य सीमा को बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
किसान नेताओं के अनुसार, नमी की सीमा में बढ़ोतरी से मंडियों में फसल बेचने के दौरान किसानों को होने वाली दिक्कतों में कमी आएगी। उनका कहना है कि मौसम में बदलाव के कारण धान में नमी का स्तर प्रभावित हो सकता है, इसलिए खरीद मानकों में व्यावहारिक बदलाव जरूरी है।
गन्ने के दाम बढ़ाने की भी मांग
प्रदर्शन के दौरान किसान संगठनों ने गन्ने के भाव में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया। किसान नेताओं का कहना है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का लाभ गन्ना उत्पादकों को भी मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य तय करने की मांग की।
किसानों ने सभी प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी देने की मांग भी दोहराई। किसान संगठनों का कहना है कि फसल उत्पादन की लागत बढ़ने के बीच किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
सरकार के सामने रखी मांगें, आंदोलन बढ़ाने का संकेत
कुरुक्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने सरकार से धान खरीद को लेकर जल्द फैसला लेने की अपील की। उनका कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए, ताकि मंडियों में फसल पहुंचने के बाद अव्यवस्था की स्थिति न बने।
किसान संगठनों ने स्पष्ट किया कि अगर 15 सितंबर से धान की खरीद शुरू नहीं की गई तो उनका विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकता है। 10 सितंबर को पिहोवा में होने वाली महापंचायत को इसी आंदोलन की अगली दिशा तय करने के लिए अहम माना जा रहा है।
धान खरीद को लेकर बढ़ा दबाव
कुरुक्षेत्र में किसान संगठनों के प्रदर्शन के बाद प्रदेश में धान खरीद का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। किसान संगठन समय पर खरीद शुरू करने के साथ नमी मानक में बदलाव और फसलों के उचित मूल्य की मांग कर रहे हैं।
अब किसान संगठनों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। यदि उनकी मांगों पर जल्द सहमति नहीं बनती है, तो पिहोवा की महापंचायत के बाद आंदोलन को लेकर बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।

