UP RERA New Rules: UP RERA ने बिल्डरों और एजेंटों के लिए नियम सख्त किए हैं। जानें QPR, बैंक अकाउंट, विज्ञापन, एजेंट ट्रेनिंग और घर खरीदारों से जुड़े नए नियम।
UP RERA New Rules: उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए UP-RERA ने बिल्डरों और रियल एस्टेट एजेंटों से जुड़े नियमों को सख्त किया है। नए प्रावधानों में प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट, बैंक खातों, एजेंट ट्रेनिंग, विज्ञापन और खरीदारों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम शामिल हैं।
अगर आप उत्तर प्रदेश में फ्लैट, प्लॉट या मकान खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो इन बदलावों को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।
बिल्डरों को देनी होगी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट
नए नियमों के तहत बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट की प्रगति से संबंधित Quarterly Progress Report यानी QPR समय पर जमा करनी होगी। इसमें प्रोजेक्ट की निर्माण स्थिति और वित्तीय प्रगति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी। इससे घर खरीदारों को प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी और बिल्डरों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
प्रोजेक्ट के पैसों के लिए अलग बैंक अकाउंट
रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से जुड़े पैसों के प्रबंधन को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं। प्रोजेक्ट के लिए कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और ट्रांजैक्शन अकाउंट बनाए रखने की व्यवस्था है।
साथ ही प्रोजेक्ट से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और खातों में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी होगा। खरीदारों से प्राप्त राशि के इस्तेमाल को लेकर भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
रियल एस्टेट एजेंटों के लिए ट्रेनिंग जरूरी
रियल एस्टेट एजेंटों के रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल को लेकर भी नए अनुपालन नियम लागू किए गए हैं। एजेंटों को निर्धारित ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके अलावा एजेंटों को अपने लेन-देन से संबंधित आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध करानी होगी। रिपोर्ट जमा करने में देरी होने पर निर्धारित शुल्क या कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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विज्ञापन में देनी होगी सही जानकारी
अब बिल्डरों के लिए प्रोजेक्ट का विज्ञापन करते समय जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देना महत्वपूर्ण होगा। विज्ञापन में प्रोजेक्ट का नाम, UP-RERA रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य आवश्यक विवरण सही तरीके से उपलब्ध कराना होगा। प्रोजेक्ट का विज्ञापन उसी नाम से होना चाहिए जो स्वीकृत योजना और संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है।
खरीदारों के लिए भी बढ़ी पारदर्शिता
नए नियमों का उद्देश्य घर खरीदारों को प्रोजेक्ट से संबंधित अधिक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। खरीदार किसी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले उसके रजिस्ट्रेशन, प्रमोटर और एजेंट से जुड़ी जानकारी की जांच कर सकते हैं।
खरीदारों को केवल विज्ञापन देखकर प्रॉपर्टी खरीदने के बजाय प्रोजेक्ट के आधिकारिक दस्तावेज और मंजूरियों की जांच करने की सलाह दी जाती है।
IFMS के पैसे को लेकर नियम
खरीदारों से लिए जाने वाले IFMS (Interest Free Maintenance Security) को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था पर जोर दिया गया है। मेंटेनेंस से संबंधित राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाना चाहिए।
जब रेजिडेंट्स एसोसिएशन कॉमन एरिया और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी संभालती है, तब संबंधित राशि को नियमों के अनुसार हस्तांतरित किया जाना जरूरी होगा।
प्रोजेक्ट के कब्जे के समय रखें सावधानी
घर का कब्जा लेते समय खरीदारों को केवल चाबी मिलने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें Possession Letter, Completion Certificate और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।
किसी भी दस्तावेज या प्रोजेक्ट की स्थिति को लेकर संदेह होने पर खरीदार को संबंधित प्राधिकरण से जानकारी लेनी चाहिए।
- घर खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- UP-RERA पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें।
- बिल्डर और रियल एस्टेट एजेंट का रजिस्ट्रेशन सत्यापित करें।
- प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट देखें।
- विज्ञापन में दी गई जानकारी को आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलाएं।
- भुगतान और बैंक अकाउंट से संबंधित नियमों को समझें।
- कब्जे के समय जरूरी प्रमाणपत्र और दस्तावेजों की जांच करें।
कुल मिलाकर, UP-RERA के इन नियमों का उद्देश्य रियल एस्टेट कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाना, बिल्डरों और एजेंटों की जवाबदेही तय करना तथा घर खरीदारों के हितों को मजबूत करना है।

