Nithin Kamath on AI: नितिन कामथ ने स्टार्टअप फाउंडर्स को AI के नाम पर निवेशक लुभाने से बचने की सलाह दी। जानें पिच डेक में क्या दिखाना जरूरी है।
Nithin Kamath on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब टेक इंडस्ट्री का सबसे चर्चित शब्द बन चुका है। ऐसे में कई स्टार्टअप अपने पिच डेक और निवेशकों के सामने AI को अपनी सबसे बड़ी खासियत के तौर पर पेश कर रहे हैं। हालांकि, Zerodha के को-फाउंडर और CEO नितिन कामथ का मानना है कि अब सिर्फ ‘हम AI का इस्तेमाल करते हैं’ कहना किसी स्टार्टअप को खास नहीं बनाता।
नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए स्टार्टअप फाउंडर्स को सलाह दी कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए केवल AI का नाम लेना पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, फाउंडर्स को यह बताने पर जोर देना चाहिए कि उनका बिजनेस वास्तव में किस समस्या को हल करता है और उससे ग्राहकों को क्या फायदा मिलता है।
‘हम AI का इस्तेमाल करते हैं’ कहना अब खास बात नहीं
नितिन कामथ ने AI के इस्तेमाल को लेकर स्टार्टअप्स की मौजूदा पिचिंग रणनीति पर टिप्पणी की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि किसी प्रोडक्ट के AI का इस्तेमाल करने की बात को इस तरह प्रचारित करना जैसे यह कोई असाधारण उपलब्धि हो, वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति रोज नहाने की बात का ढिंढोरा पीटे।
उनका इशारा साफ था कि मौजूदा दौर में AI का इस्तेमाल टेक बिजनेस के लिए तेजी से सामान्य होता जा रहा है। इसलिए केवल AI का टैग किसी कंपनी को प्रतिस्पर्धियों से अलग नहीं करता।
Nithin Kamath ने बताया निवेशकों को क्या दिखाना चाहिए
Zerodha CEO के मुताबिक, अगर कोई फाउंडर फंडिंग की तलाश में है तो उसे पिच डेक में केवल टेक्नोलॉजी के ट्रेंडिंग शब्दों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निवेशकों के लिए बिजनेस की वास्तविक क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण है।
फाउंडर्स को खास तौर पर इन सवालों के जवाब देने चाहिए:
- बिजनेस मॉडल: कंपनी कमाई कैसे करेगी और लंबे समय तक उसका मॉडल कितना टिकाऊ है?
- मार्केट पोटेंशियल: जिस समस्या का समाधान किया जा रहा है, उसका बाजार कितना बड़ा है?
- प्रोडक्ट की उपयोगिता: क्या ग्राहक वास्तव में इस प्रोडक्ट के लिए भुगतान करना चाहता है?
- अलग पहचान: कंपनी अपने प्रतिस्पर्धियों से किस तरह अलग है?
- वास्तविक इनोवेशन: क्या AI के अलावा भी बिजनेस में कोई मजबूत और टिकाऊ तकनीकी या कारोबारी बढ़त है?
हर Pitch Deck में AI देखकर ऊब रहे हैं निवेशक?
कामथ ने यह भी संकेत दिया कि उन्हें स्टार्टअप्स की तरफ से लगातार ऐसे पिच डेक मिलते हैं, जिनमें AI का इस्तेमाल एक प्रमुख आकर्षण के तौर पर पेश किया जाता है।
समस्या यह है कि जब सैकड़ों कंपनियां एक ही तरह के दावे करने लगती हैं, तो निवेशक के लिए किसी खास स्टार्टअप की वास्तविक क्षमता पहचानना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में केवल ‘AI-powered’ लिख देने से पिच मजबूत होने के बजाय उल्टा असर पड़ सकता है।
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AI ने Pitch Deck बनाना आसान किया, लेकिन अलग दिखना मुश्किल
आज जनरेटिव AI टूल्स की मदद से प्रोफेशनल और आकर्षक प्रेजेंटेशन तैयार करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। फाउंडर्स कुछ ही समय में डिजाइन, कंटेंट और प्रेजेंटेशन को बेहतर बना सकते हैं।
लेकिन यही सुविधा एक नई चुनौती भी पैदा कर रही है। जब बड़ी संख्या में स्टार्टअप एक जैसे AI टूल्स से पिच डेक तैयार करेंगे और समान शब्दावली का इस्तेमाल करेंगे, तो उनकी प्रस्तुतियों में अंतर कम होता जाएगा।
ऐसे माहौल में निवेशकों का ध्यान खींचने के लिए सिर्फ शानदार डिजाइन पर्याप्त नहीं होगा। बिजनेस की असली ताकत, टीम, बाजार और समस्या के समाधान की क्षमता ज्यादा मायने रखेगी।
Startup Founders के लिए क्या है नितिन कामथ की सलाह?
नितिन कामथ की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि फाउंडर्स को ट्रेंडिंग बजवर्ड्स के पीछे भागने के बजाय अपने बिजनेस की बुनियाद मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
अगर किसी स्टार्टअप का प्रोडक्ट AI का इस्तेमाल करता है, तो सिर्फ यह बताने के बजाय कि ‘हम AI-powered हैं’, फाउंडर को यह समझाना चाहिए कि AI की वजह से ग्राहक की कौन-सी समस्या बेहतर तरीके से हल हो रही है और कंपनी को इससे वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक फायदा कैसे मिल रहा है।
सिर्फ AI नहीं, असली बिजनेस दिखाना जरूरी
AI आज स्टार्टअप इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन निवेशकों के लिए किसी कंपनी की सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि वह AI का इस्तेमाल करती है या नहीं।
एक मजबूत बिजनेस के लिए स्पष्ट समस्या, प्रभावी समाधान, बड़ा बाजार, मजबूत बिजनेस मॉडल और टिकाऊ प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त जरूरी है।
नितिन कामथ की सलाह का सार यही है कि फाउंडर्स को पिच डेक में AI जैसे लोकप्रिय शब्दों का इस्तेमाल करने से ज्यादा अपने बिजनेस की वास्तविक कहानी और क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। आखिरकार निवेशक यह जानना चाहता है कि कंपनी क्या बनाती है, किस समस्या को हल करती है और भविष्य में कितनी बड़ी बन सकती है।

