पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कर्मचारी यूनियनों से मुलाकात की। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ₹60 लाख बीमा और लंबित मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन।
पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के वित्त मंत्री और कैबिनेट उप-समिति के अध्यक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं और लंबित मांगों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम 60 लाख रुपये के जीवन बीमा कवर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
गुरुवार को हुई इन बैठकों में शिक्षा विभाग के पांच कर्मचारी संगठनों, दो आंगनवाड़ी यूनियनों और एक आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य कर्मचारियों से सीधे संवाद स्थापित करना और उनकी मांगों के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाना था।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा बीमा सुरक्षा कवच
बैठक के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सामाजिक सुरक्षा विभाग को निर्देश दिए कि वह उन बैंकों के साथ तालमेल स्थापित करे, जिनके माध्यम से आंगनवाड़ी कर्मचारियों का वेतन भुगतान किया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कम से कम 60 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर उपलब्ध कराने की योजना तैयार की जाएगी।
सरकार का मानना है कि यह कदम आंगनवाड़ी कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा तथा कठिन परिस्थितियों में उन्हें सहायता मिलेगी।
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कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा
वित्त मंत्री ने कर्मचारी संगठनों को आश्वासन दिया कि पंजाब सरकार कर्मचारियों की वास्तविक मांगों को प्राथमिकता के आधार पर देख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
चीमा ने कहा कि कर्मचारियों को आने वाली परेशानियों को सरकार समझती है और उनकी जायज मांगों को पूरा करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया पहले से जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लंबित मामलों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।
शिक्षक संगठनों ने रखीं रोजगार और सुरक्षा से जुड़ी मांगें
बैठक में कई कर्मचारी यूनियनों ने अपनी समस्याएं और मांगें वित्त मंत्री के सामने रखीं। इनमें बेरोजगार बीएड टीईटी पास शिक्षक यूनियन, बेरोजगार पीएसटीईटी पास कला एवं शिल्प संघर्ष यूनियन, कच्चे शिक्षक यूनियन, एसएसए/एमडीएम गैर-शिक्षण कर्मचारी यूनियन पंजाब और सहायता प्राप्त स्कूलों के गैर-सहायता प्राप्त स्टाफ फ्रंट के प्रतिनिधि शामिल थे।
इन संगठनों ने नौकरी की सुरक्षा, नियमित रोजगार और लंबे समय से लंबित भर्ती संबंधी मुद्दों के समाधान की मांग की। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
आंगनवाड़ी यूनियनों ने मानदेय बढ़ाने की मांग उठाई
बैठक में आंगनवाड़ी मुलाजम यूनियन पंजाब (सीआईटीयू) और जुझारू आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायक यूनियन पंजाब के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के मानदेय में वृद्धि तथा सेवा शर्तों में सुधार की मांग रखी।
यूनियनों ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता राज्य की सामाजिक योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनकी आर्थिक और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान जरूरी है।
आउटसोर्स कर्मचारियों ने रखी अपनी मांगें
बैठक में भर्ती-आउटसोर्स समन्वय समिति ने भी अपनी मांगें प्रस्तुत कीं। समिति ने सरकार से प्रस्तावित 2026 के कार्मिक कानून के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को शामिल करने की मांग की।
इसके अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों ने सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ, नौकरी सुरक्षा और सुनिश्चित न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग भी उठाई।
सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बढ़ेगा संवाद
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार सभी विभागों के कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कर्मचारी प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और आवश्यक नीतिगत कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में सभी आठ कर्मचारी संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे और उन्होंने अपनी मांगों को कैबिनेट उप-समिति के सामने विस्तार से रखा।

