30 जून से आषाढ़ माह 2026 शुरू। जानें देवशयनी एकादशी, चातुर्मास, गुरु पूर्णिमा का महत्व, शुभ कार्य, पूजा नियम और धार्मिक मान्यताएं।
आषाढ़ माह 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार आज, 30 जून से आषाढ़ मास का शुभारंभ हो गया है। यह पवित्र महीना 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा, जिसके बाद सावन मास आरंभ होगा। धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ का महीना भगवान विष्णु की आराधना, साधना, तप और आध्यात्मिक चिंतन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी महीने आने वाली देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है।
आषाढ़ माह का धार्मिक महत्व
हिंदू कैलेंडर में आषाढ़ चौथा महीना माना जाता है। इस दौरान वर्षा ऋतु का आगमन भी होता है, जिसे प्रकृति में नए जीवन और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में आषाढ़ मास को भक्ति, संयम, ध्यान और आध्यात्मिक साधना का समय बताया गया है। इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, दान और सत्संग का विशेष महत्व माना जाता है।
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देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास
इस वर्ष 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसे हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ हो जाता है।
चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। यह समय व्रत, तप, कथा-श्रवण, भजन-कीर्तन, सेवा और आत्मचिंतन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसी अवधि में साधु-संत भी एक ही स्थान पर रहकर साधना करते हैं।
29 जुलाई को मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा
आषाढ़ मास का समापन 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के साथ होगा। इस पर्व को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का प्राकट्य हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन करने के साथ-साथ महाभारत और श्रीमद्भागवत जैसे महान ग्रंथों की रचना की।
गुरु पूर्णिमा पर गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, उनका आशीर्वाद लेने और ज्ञान के प्रति सम्मान प्रकट करने की परंपरा है।
आषाढ़ माह में कौन-कौन से प्रमुख व्रत और पर्व आएंगे?
आषाढ़ मास के दौरान कई महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर आते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- योगिनी एकादशी
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
- देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी
- गुरु पूर्णिमा
- चातुर्मास का शुभारंभ
- आषाढ़ माह में क्या करना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने कुछ विशेष धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
- भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की नियमित पूजा करें।
- प्रतिदिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- सुबह और शाम तुलसी के पौधे की पूजा कर दीपक जलाएं।
- श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम और रामचरितमानस का पाठ करें।
- अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
आध्यात्मिक साधना का विशेष समय
धार्मिक परंपराओं में आषाढ़ मास को आत्मिक उन्नति और ईश्वर भक्ति का महत्वपूर्ण काल माना गया है। इस दौरान संयमित जीवन, नियमित पूजा, सत्संग और सेवा कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिक प्रगति का प्रयास किया जाता है।

