AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर चंदा मामले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने चंपत राय और मंदिर प्रबंधन को लेकर जवाबदेही व निष्पक्ष जांच की मांग की।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी मामले को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर इस मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की।
केजरीवाल ने पूछे पांच सवाल, पहला सवाल चंपत राय को लेकर
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं, जिन्हें वह सरकार के सामने रखेंगे। उन्होंने बताया कि वह पांच सवालों के जरिए मामले से जुड़े तथ्यों को सामने लाने की कोशिश करेंगे।
अपने पहले सवाल में केजरीवाल ने पूछा कि कथित अनियमितताओं के आरोपों के बावजूद मंदिर प्रबंधन से जुड़े पदों पर बदलाव क्यों नहीं किया गया।
मंदिर प्रबंधन और जवाबदेही पर उठाया सवाल
केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर का संचालन एक ट्रस्ट के माध्यम से किया जाता है और ट्रस्ट की जिम्मेदारियों को लेकर जनता में स्पष्टता होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि आरोप सामने आने के बाद भी संबंधित जिम्मेदारियों पर बैठे लोगों को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है और दोषियों पर कार्रवाई कब होगी।
राम मंदिर से करोड़ों का चंदा चोरी हो गया। राम भक्तों में बहुत गुस्सा है और मन में कई सवाल हैं। आज मैं सरकार से पहला सवाल पूछ रहा हूँ:
पूरे राम मंदिर का कंट्रोल चंपत राय के हाथ में है। सबसे ज्यादा आरोप चंपत राय पर ही लग रहे हैं। उसे अब तक हटाया क्यों नहीं गया? क्या इस बात का डर… pic.twitter.com/8Z9C4Q3jS5
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 23, 2026
बड़े चेहरों के सामने आने का डर? – केजरीवाल
AAP संयोजक ने आरोप लगाया कि मामले में पारदर्शी जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी कहा कि राम भक्तों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अयोध्या जाने का किया ऐलान
अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि वह जल्द अयोध्या जाएंगे और इस मुद्दे को लेकर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

