डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 14वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री और पदक प्रदान किए गए, युवाओं की भूमिका को विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया गया।
राजधानी में आयोजित डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 14वें दीक्षांत समारोह में शिक्षा, युवा शक्ति और विकसित भारत के संकल्प की झलक देखने को मिली। समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए डिग्री और पदक प्रदान किए गए। इस विशेष अवसर पर देश के युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और भविष्य निर्माण में उनकी भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।
कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य अतिथियों ने विद्यार्थियों को जीवन के नए सफर के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन, संघर्ष और सपनों के साकार होने का प्रतीक है। समारोह का माहौल उत्साह, गर्व और प्रेरणा से भरा हुआ दिखाई दिया।
विद्यार्थियों की सफलता के पीछे परिवार और शिक्षकों का योगदान
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि उसके पीछे परिवार, शिक्षकों और समाज का निरंतर सहयोग और विश्वास भी जुड़ा होता है। विद्यार्थियों की उपलब्धियों को राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा गया कि शिक्षा ही समाज और देश को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी ताकत है।
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। कई विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन बताया।
विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं युवा
समारोह के दौरान युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। कहा गया कि आज का भारतीय युवा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, तकनीक और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यही युवा आने वाले समय में देश को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि देश के युवाओं में नई सोच, आत्मविश्वास और कुछ बड़ा करने का जज्बा दिखाई दे रहा है। यही ऊर्जा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को मजबूत करेगी। युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्हें लगातार सीखने, नवाचार करने और समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने का संदेश दिया गया।
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शिक्षा और अनुसंधान को मिल रहा बढ़ावा
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के महत्व पर भी चर्चा हुई। कहा गया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने का केंद्र नहीं बल्कि नई सोच, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने का मंच है। वर्तमान समय में शिक्षा को रोजगार, तकनीक और नवाचार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी छात्रों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही अनुसंधान और कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनने की प्रेरणा भी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि आज देश में नवाचार, उद्यमिता और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं। ऐसे में युवा अपनी प्रतिभा और शिक्षा का उपयोग करके समाज और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना और सकारात्मक बदलाव लाना है।
समारोह में दिखा उत्साह और गर्व का माहौल
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। पारंपरिक परिधान में पहुंचे विद्यार्थियों ने डिग्री और पदक प्राप्त कर अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की। समारोह में शिक्षा जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह को लेकर विद्यार्थियों और उनके परिवारों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कई छात्रों ने कहा कि यह उपलब्धि उन्हें भविष्य में और बेहतर करने की प्रेरणा देगी।
शिक्षा के जरिए नए भारत का निर्माण
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समारोह युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें देश निर्माण की जिम्मेदारी का एहसास भी कराते हैं। आज भारत तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में शिक्षा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालयों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीदों का प्रतीक बनकर सामने आया।

