असम के गुवाहाटी स्थित पवित्र कामाख्या मंदिर में परिवार संग पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और भारत की निरंतर प्रगति के लिए मां शक्ति से प्रार्थना की गई।
असम की पावन धरती पर स्थित मां कामाख्या देवी मंदिर में विशेष दर्शन और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जहां परिवार सहित पहुंचकर देशवासियों की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और भारत की निरंतर उन्नति के लिए प्रार्थना की गई। गुवाहाटी स्थित यह प्राचीन मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और सदियों से श्रद्धा, शक्ति तथा आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र रहा है।
मां कामाख्या के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मां शक्ति से देश में शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की कामना की। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और हर ओर भक्ति का माहौल दिखाई दिया।
पूर्वोत्तर भारत को बताया आस्था और संस्कृति की शक्ति
पूजा-अर्चना के बाद पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की विशेष सराहना की गई। कहा गया कि पूर्वोत्तर भारत केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और परंपराओं का मजबूत प्रतीक भी है। “अष्टलक्ष्मी” के रूप में पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र देश की विविधता और सांस्कृतिक शक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है।
मां कामाख्या धाम को शक्ति, साधना और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा गया कि इस पवित्र भूमि ने सदियों से पूरे देश को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
शक्तिपीठ के रूप में विशेष महत्व
कामाख्या मंदिर का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर देवी शक्ति की आराधना का प्रमुख केंद्र है और यहां मां की कृपा प्राप्त करने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना के लिए भी यह धाम बेहद प्रसिद्ध है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कामाख्या मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की प्राचीन विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। यहां आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान और पर्व हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
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देश की प्रगति और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना
पूजा के दौरान देशवासियों के अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाल जीवन और भारत की आर्थिक-सामाजिक प्रगति के लिए विशेष प्रार्थना की गई। संदेश दिया गया कि मां शक्ति का आशीर्वाद देश के हर नागरिक पर बना रहे और भारत निरंतर विकास, वैभव और गौरव के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे।
भक्तों ने भी मां कामाख्या के जयकारों के साथ देश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
धार्मिक पर्यटन को भी मिल रहा बढ़ावा
कामाख्या मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या से असम में धार्मिक पर्यटन को भी नई मजबूती मिल रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन क्षेत्र को लाभ मिल रहा है। राज्य सरकार भी मंदिर से जुड़े बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रही है।
गुवाहाटी स्थित यह मंदिर आज न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत का भी प्रमुख प्रतीक बन चुका है।
मां कामाख्या से देश के उज्ज्वल भविष्य की कामना
अंत में मां कामाख्या देवी से प्रार्थना की गई कि उनका आशीर्वाद सदैव देशवासियों पर बना रहे और भारत विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों को छूता रहे। श्रद्धालुओं ने “जय मां कामाख्या” के उद्घोष के साथ पूजा-अर्चना का समापन किया।

