मां कामाख्या धाम में पूजा-अर्चना कर प्रधानमंत्री ने देशवासियों की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और भारत की निरंतर प्रगति के लिए आशीर्वाद मांगा।
पूर्वोत्तर भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र माने जाने वाले कामाख्या मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने परिवार सहित मां कामाख्या के दरबार पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और राष्ट्र की निरंतर प्रगति की कामना की।
मां कामाख्या धाम में दर्शन के दौरान पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दिया। प्रधानमंत्री ने मां शक्ति के चरणों में नमन करते हुए देश के उज्ज्वल भविष्य और नागरिकों के कल्याण के लिए आशीर्वाद मांगा। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूजा संपन्न हुई।
पूर्वोत्तर भारत को बताया ‘अष्टलक्ष्मी’ का स्वरूप
प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर भारत को देश की ‘अष्टलक्ष्मी’ बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र नहीं बल्कि आस्था, संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और विकास की अद्भुत शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सदियों से मां कामाख्या की यह पवित्र भूमि पूरे राष्ट्र को शक्ति, साधना और सनातन परंपराओं की प्रेरणा देती रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत आज देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और यहां की सांस्कृतिक विरासत भारत की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत बनाती है।
मां कामाख्या धाम की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता
असम के नीलांचल पर्वत पर स्थित मां कामाख्या मंदिर को देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर शक्ति उपासना और तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कामाख्या धाम में देवी शक्ति का विशेष वास माना जाता है। यही कारण है कि देशभर से श्रद्धालु यहां मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। नवरात्रि और अंबुबाची मेले के दौरान यहां भारी संख्या में भक्तों का सैलाब उमड़ता है।
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आध्यात्मिक चेतना और विकास का संगम
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराएं आज भी समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा देने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मां कामाख्या की कृपा से देश निरंतर विकास, समृद्धि और गौरव के पथ पर आगे बढ़ता रहे, यही उनकी प्रार्थना है।
उन्होंने यह भी कहा कि आध्यात्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर भारत में पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर सरकार लगातार काम कर रही है।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
प्रधानमंत्री के मंदिर आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही, वहीं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। लोगों ने इसे पूर्वोत्तर भारत की आध्यात्मिक पहचान के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि देश के शीर्ष नेतृत्व का ऐसे पवित्र स्थलों पर पहुंचना भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है। इससे देश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलती है।
पूर्वोत्तर भारत बन रहा विकास का नया केंद्र
पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में सड़क, रेल, हवाई संपर्क और पर्यटन से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। सरकार लगातार इस क्षेत्र को देश के विकास का नया केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। कामाख्या धाम जैसे धार्मिक स्थलों पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु क्षेत्र के व्यापार और रोजगार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मां कामाख्या से राष्ट्र कल्याण की प्रार्थना
पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री ने मां कामाख्या से प्रार्थना की कि देश के सभी नागरिकों पर उनकी कृपा बनी रहे और भारत निरंतर उन्नति, समृद्धि और वैभव के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे। उन्होंने देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख और शांति की भी कामना की।
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस यात्रा को पूर्वोत्तर भारत की आध्यात्मिक शक्ति और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा का प्रतीक माना जा रहा है।

