हरियाणा सरकार के टीबी उन्मूलन अभियान में 30 दिनों के भीतर 10,978 नए मरीजों की पहचान हुई, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी से अभियान को नई गति मिली।
हरियाणा सरकार ने “टीबी मुक्त हरियाणा” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने अभियान को तेज कर दिया है। आधुनिक तकनीक, जनभागीदारी और गांव स्तर तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाओं के कारण राज्य में टीबी उन्मूलन अभियान को उल्लेखनीय सफलता मिल रही है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय रहते मरीजों की पहचान कर उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि 24 मार्च 2026 से शुरू किए गए 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के दूसरे चरण के तहत पहले 30 दिनों में ही 10,978 नए टीबी मरीजों की पहचान की जा चुकी है। सरकार का मानना है कि यह उपलब्धि आधुनिक तकनीकों, सक्रिय खोज अभियान और स्वास्थ्य विभाग की टीमों की मेहनत का परिणाम है।
गांव-गांव पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं
हरियाणा सरकार ने टीबी उन्मूलन अभियान को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा है। दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। राज्य में 65 चलित स्वास्थ्य इकाइयों को “चलती-फिरती जांच प्रयोगशाला” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इन इकाइयों की मदद से गांवों और दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों की मौके पर ही जांच की जा रही है।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 24 मार्च से 5 मई 2026 तक कुल 1620 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें से 938 शिविर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में लगाए गए। इन शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों की जांच कर संभावित मरीजों की पहचान की गई।
आधुनिक तकनीक से हो रही छिपे मरीजों की पहचान
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि हरियाणा में टीबी उन्मूलन अभियान के दौरान आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की मदद से दूरस्थ क्षेत्रों में भी तुरंत जांच संभव हो पा रही है।
इसके साथ ही “कफ अगेंस्ट टीबी” नामक विशेष अनुप्रयोग खांसी की आवाज का विश्लेषण करके संभावित मरीजों की पहचान करने में सहायता कर रहा है। सरकार का कहना है कि इस तकनीक की मदद से ऐसे मरीजों को भी चिन्हित किया जा रहा है जिनमें अभी स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे रहे।
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सक्रिय खोज अभियान से मिल रही सफलता
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. आर.एस. ढिल्लों ने बताया कि अब स्वास्थ्य विभाग मरीजों के अस्पताल पहुंचने का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि खुद गांवों और बस्तियों में जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर रहा है। इसे सक्रिय खोज अभियान के रूप में चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने जियोस्पेशियल तकनीक के माध्यम से 2111 संवेदनशील गांवों और वार्डों की पहचान की है, जहां विशेष निगरानी और जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।
1.81 लाख से अधिक लोगों की हुई जांच
सरकार द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार अभियान के दौरान अब तक 1 लाख 81 हजार 221 लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इनमें 49 हजार 953 एनएएटी जांच भी शामिल हैं। इन जांचों के माध्यम से 10 हजार 978 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई है।
इसके अलावा 335 नए निक्षय मित्र भी पंजीकृत किए गए हैं, जबकि मरीजों को पोषण सहायता देने के लिए 8502 पोषण किट वितरित की गई हैं।
जनभागीदारी बनी अभियान की ताकत
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि टीबी उन्मूलन अभियान की सफलता में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय लोग इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और इलाज के बारे में जानकारी दी जा रही है। इससे बीमारी को लेकर फैली सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने में मदद मिल रही है।
सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ जोड़ी गई टीबी जांच
सरकार ने टीबी जांच को सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ दिया है। अब स्वास्थ्य शिविरों में टीबी जांच के साथ-साथ रक्तचाप, मधुमेह और खून की कमी जैसी बीमारियों की जांच भी की जा रही है। इससे लोगों को एक ही स्थान पर कई स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मॉडल से लोगों में स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूकता बढ़ी है और कई गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव हो रही है।
बेटियों और महिलाओं पर विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विभाग ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस अभियान से जोड़ा है। “सहेली नेटवर्क” के माध्यम से उच्च जोखिम वाले मामलों की निगरानी की जा रही है ताकि समय रहते उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी, जबकि बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
टीबी उन्मूलन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
आरती सिंह राव ने कहा कि हरियाणा सरकार टीबी के पूर्ण उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी नागरिक इलाज और जांच से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और अब “टीबी मुक्त हरियाणा” अभियान राज्य की नई पहचान बन रहा है। सरकार आधुनिक तकनीक, जागरूकता और जनसहयोग के माध्यम से इस लक्ष्य को जल्द हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

