हरियाणा में 11 मई को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भव्य रूप से मनाया जाएगा, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने सभी जिलों को तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए।
देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आगामी 11 मई को पूरे देश में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर हरियाणा सरकार ने भी व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन से सभी जिला उपायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर कार्यक्रम को सफल बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था, साहस और आत्मसम्मान का प्रतीक है। सदियों तक हुए अनेक आक्रमणों और विनाशकारी प्रहारों के बावजूद सोमनाथ मंदिर भारतीय सभ्यता की शक्ति और गौरव का जीवंत उदाहरण बनकर खड़ा है। ऐसे गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को जोड़ना समय की आवश्यकता है।
75वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक रूप से मनाने की तैयारी
राजेश खुल्लर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 11 मई को आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को जिला स्तर पर पूरी भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा पर्व है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का मार्ग लगभग 75 वर्ष पहले प्रशस्त हुआ था और अब उसकी 75वीं वर्षगांठ देशभर में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर विभिन्न जिलों में कलश यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आध्यात्मिक सभाएं और भारतीय परंपरा एवं विरासत पर आधारित आयोजन किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रहेगा सीधा संबोधन
मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव ने बताया कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी स्वयं सोमनाथ मंदिर पहुंचेंगे और वहां से देशवासियों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री का यह संबोधन सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में सीधा प्रसारित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन सकें।
उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि कार्यक्रम स्थलों पर बड़ी स्क्रीन और आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित कर ली जाएं ताकि लाइव प्रसारण में किसी प्रकार की बाधा न आए।
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जिलों में निकलेगी कलश यात्रा
बैठक के दौरान बताया गया कि प्रत्येक जिले में कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, युवा और महिलाएं भाग लेंगी। कलश यात्रा का समापन स्थानीय शिव मंदिरों में जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के साथ होगा।
राजेश खुल्लर ने कहा कि यह आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि कार्यक्रमों में जनभागीदारी अधिक से अधिक सुनिश्चित की जाए और स्थानीय जनप्रतिनिधियों, धार्मिक संगठनों तथा सामाजिक संस्थाओं को भी इसमें शामिल किया जाए।
भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक है सोमनाथ
सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारतीय सभ्यता के संघर्ष और पुनर्जागरण की कहानी को दर्शाता है। अनेक बार आक्रमणों का सामना करने के बावजूद मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की अदम्य शक्ति और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।
सरकारी स्तर पर आयोजित होने वाला यह पर्व देशवासियों में गौरव, एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यक्रमों के दौरान भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्र गौरव से जुड़े विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाए।
प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज
हरियाणा सरकार ने सभी जिलों को कार्यक्रमों की रूपरेखा जल्द अंतिम रूप देने को कहा है। प्रशासनिक अधिकारियों को सुरक्षा, यातायात, साफ-सफाई, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान यह भी कहा गया कि कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान चलाया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इस आयोजन से जुड़ सकें। जिला प्रशासन को धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रमों को सफल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
युवाओं को इतिहास से जोड़ने का प्रयास
सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं को भारत के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेंगे। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के जरिए देश की नई पीढ़ी को यह संदेश दिया जाएगा कि भारतीय सभ्यता हर चुनौती का सामना कर पुनः मजबूती के साथ खड़ी हुई है।
राजेश खुल्लर ने कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र के आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। उन्होंने सभी अधिकारियों से कहा कि वे इस कार्यक्रम को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं ताकि हर नागरिक अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ सके।

