विद्यालय प्रबंधन समितियों को मिलेगा नया दायित्व, शिक्षा व्यवस्था में आएगा बड़ा बदलाव
देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने नई दिल्ली स्थित Vigyan Bhavan में “विद्यालय प्रबंधन समितियों के लिए दिशा-निर्देश 2026” का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में हरियाणा के शिक्षा मंत्री Mahipal Dhanda वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन समितियां (एसएमसी) शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में बेहद अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि इन समितियों को केवल औपचारिक व्यवस्था मानना गलत होगा, क्योंकि ये विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने, पारदर्शिता बढ़ाने और छात्रों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने में प्रभावी भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत प्रत्येक विद्यालय में विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन किया गया है। इन समितियों में स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, अभिभावक और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल किए जाते हैं। विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित कर शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने पर जोर दिया गया है।
मंत्री ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन समितियां एक वैधानिक निकाय के रूप में कार्य करती हैं, जहां अभिभावक, शिक्षक और समुदाय के सदस्य मिलकर विद्यालय के संचालन और विकास के लिए योजनाएं तैयार करते हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था में जनभागीदारी बढ़ती है और स्कूलों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
also read : हरियाणा सरकार का दहेज प्रथा के खिलाफ बड़ा अभियान, अब SDM करेंगे सख्त निगरानी
उन्होंने कहा कि स्कूलों में संसाधनों का सही उपयोग, अधिगम परिणामों में सुधार, छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने और बुनियादी ढांचे की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में एसएमसी की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है। इसके अलावा ये समितियां छात्रों के मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक कल्याण को सुनिश्चित करने में भी सहयोग करती हैं।
महीपाल ढांडा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रबंधन समितियों की कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। उनका उद्देश्य है कि शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र-केंद्रित बनाया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालय तभी मजबूत बनेंगे जब अभिभावक, शिक्षक और समाज मिलकर बच्चों के भविष्य के लिए जिम्मेदारी निभाएंगे।
हरियाणा सरकार ने भरोसा दिलाया कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा प्रदान करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि सरकार आधुनिक शिक्षा प्रणाली, डिजिटल संसाधनों और सामुदायिक सहयोग के जरिए स्कूलों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय प्रबंधन समितियों को मजबूत करने से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार आएगा और शिक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा और बढ़ेगा। नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद स्कूलों में पारदर्शिता, निगरानी और सामुदायिक भागीदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

