Tata Electronics 2.8 लाख करोड़ के मेगा प्लान के साथ भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
भारत के औद्योगिक क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुका Tata Group अब टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। समूह की कंपनी Tata Electronics ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में करीब 30 बिलियन डॉलर (लगभग 2.8 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कोविड-19 के बाद बदली वैश्विक सप्लाई चेन ने इस क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए हैं, जिन्हें भुनाने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं। कंपनी ने बेहद कम समय में 400 करोड़ रुपये के शुरुआती स्तर से बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू रन रेट तक पहुंचने का सफर तय किया है। कंपनी के सीईओ रणधीर ठाकुर के अनुसार, मौजूदा समय में कंपनी की वैल्यू करीब 15 बिलियन डॉलर है, जिसे अगले पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए गुजरात के धोलेरा में देश का पहला सेमीकंडक्टर फैब स्थापित कर रही है, जिसकी लागत लगभग 91,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा असम में 27,000 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक ओसैट (OSAT) यूनिट भी विकसित की जा रही है। इन परियोजनाओं में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से करीब 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलने की संभावना है, जिससे इनका क्रियान्वयन और तेज हो सकेगा।
कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों जैसे इंटेल, क्वालकॉम, बॉश और रोहम के साथ साझेदारी भी की है। खास बात यह है कि धोलेरा फैब की लगभग 70 प्रतिशत क्षमता पहले ही बुक हो चुकी है, जो इस क्षेत्र में टाटा की मजबूत रणनीति और भरोसे को दर्शाती है।
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वित्तीय प्रदर्शन के लिहाज से भी कंपनी ने उल्लेखनीय सुधार किया है। तीन साल पहले तक घाटे में चल रही कंपनी अब 4000 करोड़ रुपये से अधिक का EBITDA हासिल कर चुकी है। कंपनी अब अपने कैश फ्लो के जरिए निवेश करने में सक्षम हो गई है, जिससे उसे अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत कम पड़ती है और आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की रणनीति तीन प्रमुख स्तंभों—टेक्नोलॉजी, टैलेंट और कैपिटल—पर आधारित है। कंपनी ने पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन के साथ साझेदारी कर तकनीकी जोखिम को कम किया है, वहीं 16 देशों से विशेषज्ञों को जोड़कर टैलेंट पूल को मजबूत किया गया है।
फिलहाल कंपनी 28 नैनोमीटर से लेकर 130 नैनोमीटर तक के चिप नोड्स पर काम कर रही है, जो वैश्विक मांग का बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं। इससे कंपनी को स्थिर और दीर्घकालिक बाजार मिलने की संभावना है।
सरकार की India Semiconductor Mission और पीएलआई जैसी योजनाएं इस क्षेत्र को और गति दे रही हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स अब न केवल भारत बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टाटा का यह मेगा प्लान सफल होता है, तो भारत जल्द ही सेमीकंडक्टर निर्माण में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बन सकता है। इससे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
