हरियाणा में ‘ज्ञान भारतम’ पहल के तहत पांडुलिपियों के सर्वे, संरक्षण और डिजिटलीकरण को तेज करने के निर्देश जारी।
हरियाणा सरकार ने ‘ज्ञान भारतम’ पहल के तहत राज्य में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण को तेज करने के लिए व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी उपायुक्तों, विश्वविद्यालयों और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर समयबद्ध कार्य योजना पर जोर दिया।
मुख्य सचिव ने कहा कि यह पहल भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने और उसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में संगठित और तय समय सीमा के भीतर सर्वेक्षण पूरा किया जाए, जिसमें सरकारी संस्थानों के साथ-साथ मंदिरों, पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के पास मौजूद पांडुलिपियों को भी शामिल किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सर्वेक्षण के तहत पांडुलिपियों की पहचान, भौतिक सत्यापन, उनकी स्थिति का मूल्यांकन, विस्तृत सूचीकरण और मेटाडाटा तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके साथ ही दुर्लभ दस्तावेजों के संरक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटलीकरण की दिशा में भी काम किया जाएगा।
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तकनीकी उपयोग पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि आधुनिक स्कैनर, क्लाउड स्टोरेज और सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से इन पांडुलिपियों को संरक्षित किया जाएगा। साथ ही ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और हैंडरिटन टेक्स्ट रिकग्निशन (HTR) जैसी उन्नत तकनीकों के जरिए प्राचीन ग्रंथों को पढ़ने और समझने में आसानी होगी।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जून माह तक फील्ड सर्वे का कार्य पूरा कर लिया जाए। इसके लिए पूर्व-समन्वय, नियमित निगरानी और पखवाड़ा समीक्षा बैठकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्थानों और मीडिया के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अभिलेख दान अभियान और धरोहरशास्त्री इंटर्नशिप जैसी पहलों के जरिए युवाओं और शोधार्थियों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस पहल से एक व्यापक पांडुलिपि डेटाबेस तैयार होगा, लुप्तप्राय और दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान संभव होगी तथा भारत की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में संस्थागत और सामुदायिक सहयोग को मजबूती मिलेगी।

