हरियाणा ने एसजीएसटी वृद्धि में देश में पहला स्थान हासिल किया, साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में पानी के टैंकों की सफाई के सख्त आदेश जारी।
हरियाणा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सकल राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) राजस्व वृद्धि के मामले में देशभर में पहला स्थान हासिल कर आर्थिक मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए पानी के टैंकों की तत्काल सफाई और जांच के निर्देश जारी किए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा ने इस वित्तीय वर्ष में एसजीएसटी (पोस्ट-सेटलमेंट) राजस्व में 22 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत से कहीं अधिक है। राज्य का कुल एसजीएसटी संग्रह 48,289 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8,546 करोड़ रुपये अधिक है। इस प्रदर्शन के साथ हरियाणा ने तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में छठा स्थान प्राप्त किया है, जबकि पिछले वर्ष यह नौवें स्थान पर था।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस उपलब्धि पर संतोष जताते हुए जीएसटी दर सुधारों के लिए नरेंद्र मोदी और निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में करदाताओं की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हो रही है, जो मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बेहतर कर प्रशासन का संकेत है। वर्तमान में हरियाणा में 6.30 लाख से अधिक पंजीकृत करदाता हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक हैं।
सरकार ने कर प्रशासन को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कई सुधारों की घोषणा भी की है। इन सुधारों का उद्देश्य करदाताओं और विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कर चोरी पर सख्ती से रोक लगाना है।
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इसी बीच, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को पानी के टैंकों की तत्काल जांच और सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कई स्थानों पर पानी के टैंकों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं, जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सभी संस्थानों को जमीन के ऊपर और नीचे बने पानी के टैंकों की स्थिति का आकलन करने, गाद हटाने, सतह की सफाई और निर्धारित मानकों के अनुसार कीटाणु-मुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही, टैंकों की सफाई के लिए त्रैमासिक (हर तीन महीने) कार्यक्रम लागू करना अनिवार्य किया गया है, ताकि पानी की गुणवत्ता लगातार बनी रहे। सभी संबंधित अधिकारियों को 5 अप्रैल 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि उपायुक्तों को सात दिनों के भीतर निगरानी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
डॉ. मिश्रा ने दोहराया कि स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना स्वास्थ्य सेवाओं का मूल आधार है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हरियाणा सरकार के ये दोनों फैसले—एक ओर आर्थिक मजबूती और दूसरी ओर स्वास्थ्य सुरक्षा—राज्य के समग्र विकास और जनकल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

